लद्दाख पर केंद्र से बातचीत बेनतीजा, प्रतिनिधियों ने जल्द चुनी हुई विधानसभा बनाने की मांग दोहराई

लद्दाख की राजनीतिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में फिलहाल कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। करीब चार महीने बाद हुई बातचीत में भी लिखित मसौदा सामने नहीं आया, जिससे LAB और KDA के प्रतिनिधियों में निराशा बढ़ी है।
चार महीने बाद हुई बैठक, फिर भी नहीं निकला रास्ता
लद्दाख के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत एक बार फिर बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के बीच हुई बैठक में प्रतिनिधिमंडल को प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे का कोई लिखित ड्राफ्ट नहीं मिला।
LAB से जुड़े एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के मुताबिक पिछली बैठक 22 मई को हुई थी। करीब चार महीने बाद हुई इस बैठक से उम्मीद थी कि सरकार पहले की चर्चाओं के आधार पर कोई ठोस प्रस्ताव सामने रखेगी।
सरकार ने दिए सवाल, प्रतिनिधिमंडल ने जताई निराशा
वांगचुक के अनुसार बैठक में प्रतिनिधिमंडल को सवालों की एक सूची दी गई और कहा गया कि इन मुद्दों पर अगली बैठक में चर्चा होगी। उनका कहना है कि विधानसभा, सीधे परिसीमन और चुनाव जैसे विषयों पर पहले ही कई दौर की बातचीत हो चुकी है।

ऐसे में प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद थी कि इस बार चर्चा आगे बढ़ेगी और लिखित मसौदा सामने आएगा। लेकिन ऐसा नहीं होने से स्थानीय प्रतिनिधियों में निराशा देखने को मिली।
अक्टूबर में कारगिल में अगली बैठक
बातचीत के दौरान अगली बैठक अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में आयोजित करने का प्रस्ताव सामने आया है। प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि अगली बैठक में लद्दाख के लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर ज्यादा स्पष्टता होगी।
वांगचुक ने कहा कि उनकी मुख्य मांग जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा की स्थापना है। उनका कहना है कि प्रस्ताव को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में रखा जाना चाहिए, ताकि चुनाव और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सके।
मुआवजे पर बनी सहमति को सकारात्मक संकेत माना
बैठक में पिछले साल 24 सितंबर की घटनाओं में मारे गए और घायल हुए लोगों के मुआवजे का मुद्दा भी उठा। वांगचुक के मुताबिक सरकार ने मुआवजे को मंजूरी मिलने और जल्द घोषणा किए जाने की जानकारी दी है।
हालांकि, आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज मामलों को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। प्रतिनिधिमंडल ने सभी मामलों को एक साथ वापस लेने की मांग दोहराई है।
मुकदमे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने पर असहमति
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक सरकार की ओर से मामलों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन LAB और KDA ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी मांग है कि आंदोलन से जुड़े सभी मामलों को एक साथ वापस लिया जाए।
वांगचुक के अनुसार सरकार ने इस मांग पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
बड़े फैसलों पर रोक की मांग
LAB और KDA ने यह भी मांग रखी है कि जब तक लद्दाख में चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्था स्थापित नहीं हो जाती, तब तक क्षेत्र के स्वरूप या प्रशासनिक स्थिति को प्रभावित करने वाले बड़े फैसले न लिए जाएं।
भूमि हस्तांतरण, प्रशासनिक ढांचे और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर असर डालने वाले फैसलों को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने अपनी आपत्तियां लिखित रूप में सरकार के सामने रखी हैं।
बातचीत से समाधान की उम्मीद, आंदोलन का विकल्प खुला
वांगचुक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल आंदोलन नहीं चाहता और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि लद्दाख की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन का रास्ता फिर खुल सकता है।
उनका दावा है कि यदि शीतकालीन सत्र में प्रस्ताव आता है और चुनाव व अन्य संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है, तो करीब एक साल में लद्दाख में चुनी हुई विधानसभा स्थापित की जा सकती है। अब सबकी नजर अक्टूबर में कारगिल में होने वाली अगली बैठक पर है।
