हरियाणा के IAS पंकज अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, ₹100 करोड़ ट्रांसफर से महंगी मेहमाननवाजी तक CBI चार्जशीट में गंभीर आरोप

हरियाणा के कथित IDFC First Bank घोटाले की जांच में IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल की भूमिका को लेकर CBI की चार्जशीट में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक, सरकारी खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कराने, वित्त विभाग की निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करने और बैंक से जुड़े लोगों से कथित अनुचित लाभ लेने के आरोप हैं। मामले में CBI ने कई IAS अधिकारियों और अन्य आरोपियों को चार्जशीट किया है।
₹100 करोड़ ट्रांसफर कराने का आरोप
CBI के मुताबिक पंकज अग्रवाल दिसंबर 2024 से जून 2025 तक हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) में प्रमुख सचिव के पद पर थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी दौरान IDFC First Bank के सेक्टर-32, चंडीगढ़ स्थित अधिकारियों की ओर से नया बैंक खाता खोलने का प्रस्ताव सामने आया।
CBI के अनुसार, प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और खाता खोलने की प्रक्रिया में निर्धारित प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। एजेंसी का आरोप है कि वित्त विभाग की गाइडलाइन के तहत ₹50 करोड़ की सीमा थी, लेकिन इसके बावजूद ₹100 करोड़ ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई।
एक खाते में तीन किस्तों में पहुंची रकम
जांच के मुताबिक, नए IDFC First Bank खाते में कोटक महिंद्रा बैंक से कुल ₹100 करोड़ ट्रांसफर किए गए। यह रकम तीन किस्तों में भेजी गई थी।
CBI का आरोप है कि खाता खोलने के लिए कोई प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और दूसरे पैनल में शामिल बैंकों से कोटेशन भी नहीं मंगाए गए। एजेंसी के अनुसार, IDFC First Bank की ओर से अधिक ब्याज दर की पेशकश को आधार बनाकर प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया, लेकिन तुलनात्मक दरों की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
पंकज अग्रवाल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई रिश्वत नहीं मांगी या स्वीकार की और उनकी भूमिका केवल अधीनस्थ अधिकारियों से आए प्रस्तावों को प्रशासनिक मंजूरी देने तक सीमित थी।

₹10 करोड़ की कथित अनधिकृत निकासी
चार्जशीट में हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) से जुड़े एक अन्य बैंक खाते का भी उल्लेख है। CBI के मुताबिक, जनवरी 2026 में इस खाते से करीब ₹10 करोड़ की कथित अनधिकृत निकासी सामने आई।
एजेंसी का आरोप है कि यह रकम फर्जी या कथित तौर पर रद्द किए गए चेक के जरिए अलग-अलग संस्थाओं को ट्रांसफर की गई। अधिकारियों की ओर से मामले की जानकारी दिए जाने के बाद भी पंकज अग्रवाल ने कथित तौर पर इसे गंभीरता से नहीं लिया।
CBI के अनुसार बाद में रकम वापस आ गई, लेकिन इससे पहले बोर्ड के अधिकारियों ने अपने स्तर पर जानकारी जुटाई और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की।
रिभव ऋषि से कनेक्शन की जांच
इस पूरे मामले में IDFC First Bank के तत्कालीन चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि का नाम भी प्रमुखता से सामने आया है। CBI ने अपनी जांच में उन्हें कथित घोटाले का मुख्य सूत्रधार बताया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक सरकारी विभागों के खातों को खास बैंकों में स्थानांतरित कराने के बाद फर्जी दस्तावेजों, चेक और बैंकिंग प्रक्रियाओं के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में भेजा गया। बाद में इन पैसों को कई खातों के माध्यम से घुमाने और नकदी या दूसरी संपत्तियों में बदलने का आरोप है।
महंगी मेहमाननवाजी और निजी सुविधाओं के आरोप
CBI की चार्जशीट में पंकज अग्रवाल को कथित तौर पर दिए गए निजी लाभों का भी उल्लेख है। ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बैंक से जुड़े लोगों की ओर से लग्जरी होटल में ठहरने, पार्टियों और अन्य निजी सुविधाओं की व्यवस्था की गई।
चार्जशीट में कथित तौर पर महिलाओं को बुलाने और निजी मनोरंजन की व्यवस्था से जुड़े आरोप भी दर्ज हैं। CBI ने इन आरोपों के समर्थन में होटल रिकॉर्ड, बुकिंग विवरण, भुगतान रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और CCTV फुटेज जैसे साक्ष्यों को सूचीबद्ध किया है।
इन आरोपों को लेकर पंकज अग्रवाल के पक्ष ने कहा है कि जांच एजेंसी द्वारा आरोपों को अदालत में साबित किए जाने से पहले उन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं है।
₹504 करोड़ से ज्यादा के मामले में कई अधिकारी आरोपी
IDFC First Bank से जुड़े हरियाणा सरकार के कथित फंड डायवर्जन मामले में CBI ने सितंबर 2026 में तीसरी चार्जशीट दाखिल की। इसमें छह IAS अधिकारियों समेत 19 लोगों को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार मामले में आठ सरकारी विभागों और संस्थाओं की रकम को कथित तौर पर निजी या तीसरे पक्ष के खातों की ओर डायवर्ट किया गया।
मामले में CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, सबूत नष्ट करने, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत आरोप लगाए हैं। हालांकि IAS अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी की स्थिति भी मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है।
CBI जांच के घेरे में क्यों आए पंकज अग्रवाल?
पंकज अग्रवाल 2000 बैच के IAS अधिकारी हैं और हरियाणा में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। उन्हें जून 2026 में CBI ने गिरफ्तार किया था और बाद में राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया।
CBI की जांच में उनका नाम दो अलग-अलग विभागों में बैंक खाते खोलने और सरकारी धन के ट्रांसफर से जुड़े निर्णयों के संदर्भ में सामने आया। एजेंसी का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं में वित्त विभाग की निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया और इससे कथित वित्तीय अनियमितताओं का रास्ता बना।
अब आगे क्या होगा?
मामले में CBI की चार्जशीट के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में चलेगी। चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को अदालत में साक्ष्यों के आधार पर परखा जाएगा। अभियोजन की अनुमति से जुड़े कानूनी पहलू भी आगे की कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल जांच एजेंसी का फोकस कथित तौर पर सरकारी धन के प्रवाह, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के बीच संपर्क तथा रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने पर है।
हरियाणा के कथित IDFC First Bank फंड घोटाले में CBI की चार्जशीट ने पंकज अग्रवाल की भूमिका से जुड़े कई सवाल सामने रखे हैं। ₹100 करोड़ के ट्रांसफर, ₹10 करोड़ की कथित अनधिकृत निकासी और निजी सुविधाओं से जुड़े आरोप जांच के केंद्र में हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना अभी बाकी है।
