सीतापुर सांसद राकेश राठौर की FIR हाईकोर्ट ने की क्वैश, बोले- अब झूठी FIR कराने वालों के खिलाफ जाएंगे कोर्ट

सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को दुष्कर्म के आरोप से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से राहत मिली है। कोर्ट ने जनवरी 2025 में दर्ज FIR को क्वैश कर दिया। फैसले के बाद राठौर ने कोर्ट का आभार जताते हुए आगे कानूनी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
हाईकोर्ट ने FIR की क्वैश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस सांसद राकेश राठौर के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म मामले की FIR को क्वैश कर दिया है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह आदेश दिया। FIR जनवरी 2025 में सीतापुर के सिटी कोतवाली थाने में दर्ज हुई थी। इस मामले में करीब 20 महीने तक कानूनी प्रक्रिया चली।
राठौर ने पहले हाईकोर्ट में FIR और बाद की कानूनी कार्यवाही को चुनौती दी थी। मई 2025 में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक भी लगाई थी।
फैसले के बाद राकेश राठौर की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद राकेश राठौर ने हाईकोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने FIR, आरोपों और चार्जशीट के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था और अदालत ने अब FIR को क्वैश कर दिया है।
राठौर ने अपने बयान में कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार थे। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत द्वारा FIR क्वैश किए जाने और आरोपों के निराधार होने के बारे में सांसद की राजनीतिक/व्यक्तिगत व्याख्या को अदालत के आदेश की भाषा से अलग समझा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में राठौर ने स्वयं कहा कि आरोपों को हाईकोर्ट ने असत्य और निराधार माना।

अब FIR कराने वालों के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी
राकेश राठौर ने कहा कि वह अपने वकीलों से सलाह लेने के बाद उन लोगों और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी विकल्प तलाशेंगे, जिनके बारे में उनका आरोप है कि उन्होंने उनके खिलाफ झूठी FIR कराई या उनकी बात सुने बिना जांच और चार्जशीट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर करने की संभावनाओं पर भी अपने वकीलों से चर्चा करने की बात कही है।
क्या था पूरा मामला?
मामले में एक महिला ने राकेश राठौर पर शादी का झांसा देने और राजनीतिक करियर में मदद करने के नाम पर कई वर्षों तक यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। FIR सीतापुर के सिटी कोतवाली थाने में दर्ज हुई थी। राठौर ने आरोपों को गलत और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था।
जनवरी 2025 में हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज की थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। बाद में उन्हें जमानत मिली और मई 2025 में हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर भी अंतरिम रोक लगा दी थी।
20 महीने बाद आया बड़ा कानूनी मोड़
अब हाईकोर्ट द्वारा FIR क्वैश किए जाने के बाद यह मामला एक नए कानूनी चरण में पहुंच गया है। राठौर ने स्पष्ट किया है कि वह आगे अपने वकीलों से सलाह लेकर संबंधित लोगों और अधिकारियों के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर आगे बढ़ेंगे।
