
जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में परीक्षा के दौरान छात्रों का गुस्सा उस वक्त सामने आया, जब उन्होंने हिंदी का प्रश्नपत्र सिलेबस से बाहर होने का आरोप लगाया। छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया और परीक्षा दोबारा कराने के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई।
हिंदी के पेपर पर छात्रों ने उठाए सवाल
परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों का आरोप है कि हिंदी के प्रश्नपत्र में ऐसे सवाल पूछे गए, जो निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं थे। छात्रों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी उन्होंने तय सिलेबस के आधार पर की थी, लेकिन प्रश्नपत्र अलग होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
विद्यार्थियों ने मांग की कि विवादित हिंदी परीक्षा को निरस्त कर दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए, ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिल सके।
पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स का भी जिक्र
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दावा किया कि इससे पहले पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स के प्रश्नपत्रों को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। छात्रों के मुताबिक, पॉलिटिकल साइंस में यूनिट के अनुसार प्रश्न नहीं पूछे जाने की शिकायत सामने आई थी।
लगातार परीक्षा से जुड़ी शिकायतों ने विद्यार्थियों की नाराजगी बढ़ा दी है। उनका कहना है कि बार-बार पेपर को लेकर विवाद होने से पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है।

जून-जुलाई की परीक्षाएं सितंबर में
छात्रों ने परीक्षा कार्यक्रम को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जून-जुलाई में होने वाली परीक्षाएं सितंबर में आयोजित की जा रही हैं। विद्यार्थियों के मुताबिक, इससे उनकी आगे की पढ़ाई और शैक्षणिक योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पहले भी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारी तय करने को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सुबह से परिसर में प्रदर्शन
छात्रों के अनुसार, वे सुबह करीब सात बजे से विश्वविद्यालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर बैठे थे। काफी देर तक अधिकारियों से बातचीत नहीं होने पर नाराज छात्र कुलपति के घर पहुंच गए और मुलाकात की मांग की।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि कुलपति सीधे विद्यार्थियों से बातचीत करें और समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
पुलिस पहुंची, छात्रों ने रखीं मांगें
प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों से बातचीत कर स्थिति संभालने का प्रयास किया। विद्यार्थियों ने हिंदी की परीक्षा दोबारा कराने, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की जांच और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग रखी। परीक्षा किसी भी छात्र के लिए महीनों की मेहनत का परिणाम होती है। ऐसे में प्रश्नपत्र को लेकर उठी शिकायतों का निष्पक्ष समाधान जरूरी है। अब छात्रों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और हिंदी परीक्षा को लेकर लिए जाने वाले अगले फैसले पर है।
