
UPI के नए Merchant Discount Rate (MDR) को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित शुल्क ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका अंतिम आर्थिक बोझ आम जनता पर पड़ सकता है। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि नया MDR सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा।
मायावती ने UPI शुल्क व्यवस्था पर उठाए सवाल
मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि UPI डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब शुल्क की व्यवस्था शुरू करना जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम है। उन्होंने इसे लेकर सरकार की नीति और आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए।
मायावती का कहना है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था को भले ही ‘कर’ न कहा जाए, लेकिन इसका असर अंततः आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
15 अक्टूबर से क्या बदलने वाला है?
केंद्र सरकार और NPCI के घोषित नए ढांचे के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी।
हालांकि, यह शुल्क सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा। Person-to-Person (P2P) भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, जबकि ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

सरकार का कहना- ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा शुल्क
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूल नहीं किया जाएगा। यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि ग्राहकों से MDR सीधे वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
यानी मायावती की चिंता मुख्य रूप से इस संभावित स्थिति को लेकर है कि व्यापारी अपनी लागत बढ़ने पर किसी दूसरे तरीके से उसका असर कीमतों में डाल सकते हैं। वहीं सरकार का घोषित रुख है कि MDR का बोझ ग्राहक पर सीधे नहीं डाला जाना चाहिए।
छोटे दुकानदारों के लिए क्या व्यवस्था है?
नए फ्रेमवर्क में छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है। सरकार के मुताबिक, UPI QR के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी और स्ट्रीट वेंडर शून्य-MDR व्यवस्था में बने रहेंगे।
कुछ आवश्यक क्षेत्रों जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े ₹2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए 0.4% के बजाय ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।
स्मार्ट स्कूलों पर भी मायावती ने उठाए सवाल
मायावती ने उत्तर प्रदेश में करीब 14,500 स्कूलों को लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल और स्मार्ट सुविधाओं के साथ स्कूलों में बुनियादी जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने स्कूलों में छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही और सवाल उठाया कि प्रस्तावित राशि में ये व्यवस्थाएं किस हद तक पूरी हो पाएंगी। यह उनकी ओर से उठाया गया सवाल है; इसकी व्यवहार्यता का आकलन वास्तविक परियोजना लागत और स्कूल-वार कार्ययोजना से ही किया जा सकेगा।
UPI शुल्क पर आगे भी जारी रह सकती है बहस
UPI के नए MDR ढांचे को लेकर सरकार ने इसे डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ा है, जबकि मायावती समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने संभावित लागत और उसके अप्रत्यक्ष प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
