
NEET UG परीक्षा को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। एक ओर विपक्ष कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला कर रहा है, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति से छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
छात्रों के मन में डर न फैलाने की अपील
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि युवाओं, खासकर NEET की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के मन में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के हर जिम्मेदार नेता का कर्तव्य है कि वह छात्रों का मनोबल बढ़ाए, न कि उन्हें असमंजस में डाले। उनके मुताबिक शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को राजनीतिक विवाद का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस की रैली पर भी उठाए सवाल
शिक्षा मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक रैली का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि बेंगलुरु में आयोजित रैली के कारण कुछ छात्र समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके थे। उनका कहना था कि जब विपक्ष खुद ऐसी परिस्थितियां पैदा करता है तो उसे परीक्षा प्रबंधन पर नैतिक उपदेश देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।

NTA की जिम्मेदारी और जांच जारी
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी स्वीकार किया कि परीक्षा व्यवस्था में कुछ स्तरों पर चूक हुई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने जिन लोगों पर जिम्मेदारी सौंपी थी, उनमें से कुछ ने भरोसा तोड़ा। “रक्षक ही भक्षक बन गए” जैसी टिप्पणी करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ी जवाबदेही
NEET विवाद ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। लाखों छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें इस परीक्षा से जुड़ी होती हैं, इसलिए पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सरकार जांच और सुधार की बात कर रही है, जबकि विपक्ष जवाबदेही की मांग पर अड़ा है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और सरकार के कदम यह तय करेंगे कि छात्रों का भरोसा किस तरह दोबारा मजबूत किया जा सकेगा।
