
अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जारी राजनीतिक घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना भी उचित नहीं है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए पारदर्शी और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
देश के प्रमुख मंदिरों जैसी व्यवस्था अपनाने की सलाह
मायावती ने अपने बयान में कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, गबन और अनियमितताओं से जुड़ी लगातार सामने आ रही खबरें बेहद गंभीर और चिंताजनक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर किसी प्रकार का विवाद न हो, इसके लिए देश के अन्य प्रतिष्ठित मंदिरों में अपनाई जा रही पारदर्शी लेखा-प्रणाली और प्रबंधन व्यवस्था का अध्ययन कर उसे राम मंदिर में भी लागू किया जाना चाहिए।
राजनीतिक दलों और जनता से की अपील
बसपा प्रमुख ने राजनीतिक दलों और देशवासियों से भी अपील की कि इस मामले को अनावश्यक राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने कहा कि राजनीति का अपराधीकरण, अपराध का राजनीतिकरण, धर्म का राजनीतिकरण और राजनीति का अंध-धार्मिककरण—इन सभी प्रवृत्तियों से बचना लोकतंत्र और संविधान की भावना के अनुरूप है। उन्होंने नागरिकों से भी जिम्मेदारी और संयम बरतने की अपील की।

आठ आरोपी न्यायिक हिरासत में, 13 जुलाई को अगली सुनवाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सोमवार (29 जून) को सभी आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अयोध्या की अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।
पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल बाकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग भी की जा सकती है। फिलहाल मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच जारी है।
