राजनीतिराज्य

संसद मार्च के बीच CJP और सरकार में बातचीत, दिल्ली में प्रदर्शन के साथ बढ़ा सियासी तनाव

दिल्ली में संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन सड़कों से लेकर संसद परिसर तक राजनीतिक हलचल तेज रही। एक ओर CJP के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी रहा, वहीं दूसरी ओर संगठन के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच हुई मुलाकात ने घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। इसी बीच लाठीचार्ज, आंसू गैस और संसद में हंगामे ने पूरे दिन को सुर्खियों में बनाए रखा।

CJP प्रतिनिधिमंडल की जेपी नड्डा से मुलाकात

प्रदर्शन के बीच CJP के प्रवक्ता सौरभ दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इसकी जानकारी सौरभ दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। इस मुलाकात को आंदोलन और सरकार के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि बातचीत के नतीजों पर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

कौन हैं सौरभ दास और आशुतोष रांका?

सौरभ दास पेशे से इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट हैं और कानून, शासन तथा न्यायपालिका से जुड़े विषयों पर काम करते रहे हैं। वे CJP के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हैं। वहीं आशुतोष रांका आईआईटी कानपुर और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। हाल के महीनों में CJP से जुड़ने के बाद वे संगठन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं।

संसद मार्च के बीच CJP और सरकार में बातचीत, दिल्ली में प्रदर्शन के साथ बढ़ा सियासी तनाव

प्रदर्शन के दौरान झड़प और सुरक्षा सख्त

संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर झड़प हुई। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और संसद मार्ग थाना क्षेत्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना सामने आई।

संसद और मेट्रो सेवाओं पर भी पड़ा असर

विरोध प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिला। विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। राजधानी के कई हिस्सों में यातायात भी प्रभावित रहा।

आंदोलन की मुख्य मांगें और आगे की राह

प्रदर्शनकारी NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। कई प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग उठाना है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शुरू हुआ संवाद किसी समाधान तक पहुंचता है या आंदोलन आगे और तेज होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button