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जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक; मायावती ने फैसले का किया स्वागत

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई फिलहाल टल गई है। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर ने अंतिम फैसला आने तक बुलडोजर कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी तेज हो गया है।

यूनिवर्सिटी को मिली अंतरिम राहत

उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर ने रामपुर जिला प्रशासन के ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए निर्देश दिया है कि यूनिवर्सिटी की अपील पर अंतिम निर्णय होने तक किसी भी इमारत को नहीं गिराया जाएगा। इससे यूनिवर्सिटी प्रशासन और वहां पढ़ने वाले छात्रों को अस्थायी राहत मिली है।

मायावती ने फैसले का किया स्वागत

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि यदि निर्माण संबंधी स्वीकृतियों में कमी है, तो सरकार को सीधे बुलडोजर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित संस्थानों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुधार और नियमितीकरण का अवसर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में छात्रों की पढ़ाई और भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत, बुलडोजर कार्रवाई पर लगी रोक; मायावती ने फैसले का किया स्वागत

क्यों जारी हुआ था ध्वस्तीकरण का आदेश?

रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने जांच के बाद यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का कहना था कि इन भवनों के निर्माण के लिए आवश्यक नक्शा और वैधानिक अनुमतियां नहीं ली गई थीं। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत प्रस्तावित की गई थी।

छात्रों के विरोध के बाद बढ़ा मामला

ध्वस्तीकरण आदेश सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आदेश के खिलाफ अपील दायर की। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर ने अंतिम निर्णय तक कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया।

जौहर यूनिवर्सिटी का इतिहास

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जाता है। इसकी स्थापना 18 सितंबर 2006 को हुई थी, जबकि आधिकारिक उद्घाटन 18 सितंबर 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में हुआ। बताया जाता है कि शुरुआती दो भवनों के लिए अनुमति ली गई थी, लेकिन बाद में बने 38 भवनों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां नहीं ली गईं, जो वर्तमान विवाद का मुख्य आधार बनीं।

जौहर यूनिवर्सिटी पर फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई रुक गई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है। अंतिम फैसला अपील पर सुनवाई पूरी होने के बाद ही आएगा। यह मामला केवल निर्माण नियमों का नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून के संतुलित पालन का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। अब सभी की नजरें कमिश्नर के अंतिम आदेश और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।

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