कारगिल विजय दिवस पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने वीर शहीदों को किया नमन, सुनाई भावुक कविता

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शहीदों को नमन करते हुए उनके साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को याद किया।
सेना प्रमुख ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कहा कि वह देश के बहादुर वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने शहीदों के परिवारों को भी नमन करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कार्यक्रम में मौजूदगी को भारतीय सेना के लिए प्रेरणादायक बताया।
सुनाई अपने यूनिट के सैनिक की लिखी कविता
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि इस अवसर पर उन्हें अपनी यूनिट के एक सैनिक द्वारा लिखी गई रचना याद आ रही है। उन्होंने मंच से कविता की पंक्तियां सुनाईं—
मरना सभी को है तुम भले मरे,
करके नमक हलाल लड़ते हुए गिरे,
भूलोगे आप नहीं जो छिप गई शक्ल,
सफ़े-ज़मीं पर नाम हुआ तुम्हारा अटल।
उन्होंने कहा कि यह कविता कारगिल के सभी वीर बलिदानियों की भावना को सच्चे अर्थों में व्यक्त करती है।

भारतीय सेना के शौर्य का किया उल्लेख
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना का प्रत्येक सैनिक साहस, अनुशासन और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि दुनिया की किसी भी सेना के मुकाबले भारतीय सैनिक अपनी क्षमता, वीरता और कर्तव्यनिष्ठा के कारण अलग पहचान रखते हैं।
देश की सुरक्षा के लिए संकल्प दोहराया
जनरल धीरज सेठ ने कहा कि भारतीय थल सेना देश की सुरक्षा और प्रगति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सेना भविष्य में भी देश की रक्षा करते हुए भारत का तिरंगा और ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करती रहेगी।
पूरे देश ने मनाया कारगिल विजय दिवस
26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में ऐतिहासिक विजय हासिल की थी। हर वर्ष इस दिन देशभर में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई नेताओं ने भी वीर जवानों के साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
कारगिल विजय दिवस भारत के वीर सैनिकों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को याद करने का दिन है। द्रास में आयोजित समारोह में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का संबोधन और शहीदों को समर्पित कविता उन वीरों के प्रति पूरे देश की श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आई।
