
हरियाणा सरकार द्वारा बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक बहस देखने को मिली। इस सत्र में इनेलो के दोनों विधायक अर्जुन सिंह चौटाला और आदित्य देवीलाल शामिल हुए, लेकिन उन्होंने इस बिल का समर्थन नहीं किया। सदन में उनकी भूमिका विपक्ष के रूप में सामने आई, जहां उन्होंने सरकार की मंशा और बिल की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। यह सत्र महिला आरक्षण और संवैधानिक संशोधन जैसे मुद्दों को लेकर काफी चर्चा में रहा।
भाजपा पर परिसीमन बिल को लेकर गंभीर आरोप
विधायक अर्जुन सिंह चौटाला ने सदन में बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार नारी शक्ति वंदन बिल की आड़ में परिसीमन बिल पास करवाना चाहती थी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल पहले ही सितंबर 2023 में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से बहुमत के साथ पारित हो चुका है, इसलिए अलग से संशोधन की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार सरकार इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रही है और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।

विपक्ष की अनुपस्थिति और सदन में इनेलो की भूमिका
सदन की कार्यवाही के दौरान जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बोल रहे थे, तब उन्होंने कांग्रेस विधायकों की अनुपस्थिति पर सवाल उठाया। हालांकि उन्होंने यह भी संतोष जताया कि विपक्ष के रूप में इनेलो के दोनों विधायक सदन में मौजूद हैं। इसी दौरान इनेलो विधायकों ने सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और खुद को विपक्ष की भूमिका में स्थापित किया। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ा रही है।
महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर तीखी बहस
अर्जुन चौटाला ने कहा कि 131वें संवैधानिक संशोधन को लेकर सरकार गलत धारणा फैला रही है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने दावा किया कि वास्तविकता यह है कि महिला आरक्षण पहले ही पारित हो चुका था और इसे लागू करने के लिए जनगणना जरूरी थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के जरिए सीटों का पुनर्वितरण अपने अनुसार करना चाहती है। चौटाला ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण चाहती है तो उसे शिक्षा और अवसरों पर ध्यान देना चाहिए और महिला आरक्षण को निष्पक्ष तरीके से लागू करना चाहिए।
