
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े और तेज फैसले ले रही है। सरकार ने अब 50 प्रतिशत तक खराब चमक वाले गेहूं की भी खरीद का निर्णय लिया है जिससे अन्नदाता को नुकसान से बचाया जा सके। इसके साथ ही कम विकसित दाने और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा भी बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक कर दी गई है। इन फैसलों का उद्देश्य किसानों की उपज को हर स्थिति में उचित मूल्य दिलाना और उनकी आय को सुरक्षित करना बताया जा रहा है।
फसल समर्थन और बोनस से किसानों की आय में वृद्धि
राज्य सरकार ने दलहन और तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं लागू की हैं। उड़द की खरीद अब समर्थन मूल्य पर की जाएगी और किसानों को अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। सोयाबीन के बाद अब सरसों पर भी भावांतर योजना लागू की गई है जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों को एमएसपी से अधिक लाभ मिले और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

सिंचाई और बिजली में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
साल 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित करते हुए सरकार ने किसानों को बड़ी राहतें दी हैं। अब किसानों को केवल 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है। साथ ही दिन में सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। कृषक मित्र योजना के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप भी दिए जा रहे हैं। इससे किसानों को बिजली पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
दुग्ध उत्पादन और आर्थिक सहायता से मजबूत हो रहा ग्रामीण अर्थतंत्र
मध्य प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है। नई 1752 दुग्ध समितियों का गठन किया गया है और प्रतिदिन 10 लाख किलो से अधिक दूध संग्रह हो रहा है। किसानों को अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत हर साल 6000 रुपये की सहायता राशि सीधे खातों में दी जा रही है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।
