
बिहार सरकार ने राज्य में एक अहम प्रशासनिक निर्णय लिया है। अब सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राष्ट्रीय गीत से होगी। इसके बाद राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी आदेश में सभी विभागों और जिलाधिकारियों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार किसी भी सरकारी कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत तभी मानी जाएगी जब दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मानपूर्वक गायन पूरा हो जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन और समापन भी तय प्रक्रिया के अनुसार
जारी निर्देशों के मुताबिक राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के बाद ही किसी सरकारी कार्यक्रम का औपचारिक संचालन शुरू किया जाएगा। इसके बाद कार्यक्रम के समापन पर बिहार राज्य गीत “मेरे भारत के कंठहार” का गायन अनिवार्य किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को मजबूती मिलेगी। इस व्यवस्था को सरकारी आयोजनों में अनुशासन और एकरूपता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू होगा नया नियम
यह नियम केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में भी लागू होगा। आदेश के अनुसार स्कूलों और कॉलेजों में किसी भी गतिविधि या कार्य की शुरुआत राष्ट्रीय गीत और उसके बाद राष्ट्रगान से होगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसे हर कक्षा की शुरुआत में अनिवार्य किया जाएगा या केवल विशेष कार्यक्रमों तक सीमित रखा जाएगा। इस पर आगे दिशा-निर्देश आने की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्रीय भावना और बिहार गौरव को बढ़ाने का उद्देश्य
सरकार ने इस फैसले के पीछे उद्देश्य स्पष्ट किया है कि इसका मकसद नागरिकों में राष्ट्रीयता की भावना, एकता और गौरव को बढ़ाना है। बिहार राज्य गीत को अनिवार्य करने का उद्देश्य राज्य के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना बताया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से युवाओं में देश और राज्य के प्रति सम्मान की भावना और अधिक प्रबल होगी तथा सामाजिक एकता को भी बढ़ावा मिलेगा।
