
हरियाणा सरकार के सरकारी फंड में कथित 504 करोड़ रुपये की हेराफेरी का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। CBI ने जांच आगे बढ़ाते हुए 19 आरोपियों के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दाखिल की है। आरोपियों में IAS अधिकारियों से लेकर बैंक कर्मी और सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल हैं।
19 आरोपियों पर दाखिल हुई तीसरी चार्जशीट
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 2 सितंबर 2026 को पंचकूला की विशेष CBI अदालत में तीसरी चार्जशीट दाखिल की। इसमें कुल 19 आरोपियों के नाम शामिल हैं।
CBI के मुताबिक, इनमें छह IAS अधिकारी, IDFC फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारी, AU Small Finance Bank का एक अधिकारी और हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारी शामिल हैं।
हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला होना अभी बाकी है।
सरकारी पैसे को दूसरे खातों में भेजने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक अधिकारियों ने कथित मिलीभगत से सरकारी धन को चुनिंदा बैंक शाखाओं में ट्रांसफर कराया।
इसके बाद यह रकम ऐसे लोगों और संस्थाओं के बैंक खातों में पहुंचाई गई, जिनका संबंधित सरकारी विभागों से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। CBI के अनुसार, कई खातों के जरिए रकम की लेयरिंग की गई और बाद में इसे कथित तौर पर नकदी में बदला गया।

आठ सरकारी विभागों पर पड़ा असर
CBI के अनुसार, कथित वित्तीय अनियमितताओं का असर हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संस्थानों के फंड पर पड़ा।
इनमें पंचायती विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, श्रम कल्याण बोर्ड, कृषि विपणन बोर्ड, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन शामिल हैं।
37 आरोपी चार्जशीट में, 26 गिरफ्तार
तीसरी चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस मामले में अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। CBI के मुताबिक, इनमें से 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, खातों में हेरफेर और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोप लगाए गए हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है।
54 ठिकानों पर छापेमारी
जांच के दौरान CBI ने कुल 54 ठिकानों पर तलाशी ली। एजेंसी का कहना है कि इन कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना भी जब्त किया गया है। अब जांच का फोकस कथित रकम की पूरी मनी ट्रेल का पता लगाने पर है।
विजिलेंस से CBI तक पहुंचा मामला
यह मामला शुरुआत में हरियाणा स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के पास था। बाद में राज्य सरकार के अनुरोध पर CBI ने जांच अपने हाथ में ले ली।
तीसरी चार्जशीट के बाद जांच का दायरा और विस्तृत हो गया है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धन कथित तौर पर किन रास्तों से अलग-अलग खातों तक पहुंचा और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
पूरी मनी ट्रेल पर टिकी नजर
504 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का यह मामला सरकारी धन की सुरक्षा और वित्तीय निगरानी से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि जांच अभी जारी है और अदालत में आरोपों की न्यायिक जांच बाकी है।
अब CBI की अगली कार्रवाई और मनी ट्रेल से सामने आने वाले तथ्य अहम होंगे। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी फंड की कथित हेराफेरी का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा था और इसकी अंतिम जिम्मेदारी किन लोगों पर तय होती है।