
हरीश रावत ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम पर केवल राजनीतिक दिखावा कर रही है। काशीपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर वास्तविक इच्छाशक्ति नहीं दिखा रही है और इसे केवल चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
कांग्रेस का रुख और विधेयक पर सर्वसम्मति का दावा
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को 2023 में सभी राजनीतिक दलों की सहमति से संसद में पारित किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का रुख हमेशा से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यदि परिसीमन और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर राज्यों की आपत्तियों का समाधान किया जाए तो पार्टी इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने को तैयार है।

भाजपा पर देरी और राजनीतिक मंशा के आरोप
हरदा ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने जानबूझकर परिसीमन और जनसंख्या जैसे तकनीकी मुद्दों को जोड़कर महिला आरक्षण लागू करने में देरी की है। उनका कहना है कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट होती तो संसद की 543 सीटों में ही एक-तिहाई सीटें सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती थीं। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रपंच बताते हुए कहा कि इस देरी के पीछे वास्तविक उद्देश्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति पर बयान का असर
उत्तराखंड में इस बयान को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। हरीश रावत ने कहा कि जनता अब भाजपा की असली मंशा को समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका असर चुनावी राजनीति पर भी दिखेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि चाहे कितने भी प्रयास किए जाएं, जनता वास्तविकता से अवगत हो चुकी है। इस बयान ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
