वाराणसी में पकड़ा गया फर्जी IAS, महिला चिकित्सक से ठगी का खुलासा, सोशल मीडिया तस्वीरों से बनाता था नकली पहचान

शादी के लिए बने ऑनलाइन रिश्ते में महिला डॉक्टर को लगा कि सामने वाला पढ़ा-लिखा और प्रतिष्ठित अधिकारी है। लेकिन बातचीत आगे बढ़ने पर कथित IAS अधिकारी की असली पहचान सामने आई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने फर्जी पहचान और AI एडिटेड तस्वीरों के सहारे करीब 3 लाख रुपये की ठगी की।
जीवनसाथी डॉट कॉम से बनाया संपर्क
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने जीवनसाथी डॉट कॉम के जरिए महिला चिकित्सक से संपर्क किया। उसने खुद को डॉक्टर होने के साथ-साथ IAS अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उसने MBBS, MD और DM की पढ़ाई की है और UPSC परीक्षा पास करने के बाद उसे मध्य प्रदेश कैडर मिला है।
इन दावों के जरिए आरोपी ने महिला चिकित्सक का भरोसा जीत लिया और बातचीत को आगे बढ़ाया।
धार में SDM होने का किया दावा
आरोपी ने महिला से यह भी कहा कि वह मध्य प्रदेश के धार जिले में SDM के पद पर तैनात है। उसने वरिष्ठ अधिकारियों से अपने करीबी संबंध होने का दावा भी किया।
पुलिस के मुताबिक, इसी प्रभावशाली पहचान का इस्तेमाल करते हुए आरोपी ने महिला को सहायता करने का झांसा दिया और करीब 3 लाख रुपये की धोखाधड़ी कर दी।

AI से तैयार करता था फर्जी तस्वीरें
जांच में आरोपी के कथित तौर पर AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। वह तस्वीरों को एडिट कर खुद को उच्च पदस्थ अधिकारी के रूप में पेश करता था।
इतना ही नहीं, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक संस्थानों से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर वह अपनी कथित सरकारी पहचान को मजबूत करता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने गांव और परिवार के लोगों को भी खुद को IAS अधिकारी बताकर भ्रमित कर रखा था।
वाराणसी से पुलिस ने दबोचा
शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो उसकी लोकेशन वाराणसी में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अब पुलिस आरोपी की गतिविधियों, उसके संपर्कों और ठगी के संभावित अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
बिहार में भी सामने आया था ऐसा मामला
फर्जी IAS बनकर लोगों को प्रभावित करने का यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, वह खुद को IAS अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताता था।
उसके घर से कथित तौर पर टेस्ला कार, टाटा सफारी, मोबाइल फोन, बैंक कार्ड और अन्य सामान बरामद किया गया था। पुलिस को मिला IAS अधिकारी का पहचान पत्र भी शुरुआती जांच में फर्जी पाया गया।
ऑनलाइन रिश्तों में पहचान की जांच जरूरी
दोनों मामलों से एक अहम सवाल उठता है—सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर दिखाई जाने वाली पहचान पर कितनी जल्दी भरोसा किया जाए? ऊंचे पद, महंगी गाड़ियां या अधिकारियों के साथ तस्वीरें किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान का प्रमाण नहीं हैं।
ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी और पैसे साझा करने से पहले पहचान, नौकरी और दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन करना बेहद जरूरी है।
