
ind Municipal Council : हरियाणा में अगले साल जून में होने वाले निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। निकाय चुनाव के लिए सबसे पहले वार्डबंदी का काम किया जाना है। इसके लिए समितियां का गठन हो चुका है और वार्डबंदी की तैयारी शुरू हो गई है।
बात अगर जींद नगर परिषद की करें तो पिछले 40 साल में केवल तीन महिलाएं अपना कार्यकाल पूरा कर सकी हैं। सबसे पहले तेजेंद्र कौर ने जींद नगर परिषद में लगातार 5 साल तक अध्यक्ष की कुर्सी संभालने का काम किया। उसके बाद पूनम सैनी ने 5 साल जींद नगर परिषद पर राज किया। और वर्तमान में डॉक्टर अनुराधा सैनी अपने कार्यकाल को पूरा करने की तरफ बढ़ रही हैं।
अक्टूबर 1987 में एक लंबे समय के बाद प्रदेश में पालिका चुनाव करवाए गए थे। उसे समय इंदर सैन गोयल जींद नगर परिषद के प्रधान चुने गए थे। ढाई महीने बाद ही उनका तख्ता पलट हो गया और रामकरण सैनी को कार्यवाहक प्रधान बनाया गया। करीब 2 महीने बाद 16 मार्च 1988 को अभय सिंह आर्य प्रधान चुने गए। 1 साल पूरा होते ही उन्हें भी प्रधान पद से हटा दिया गया और गुलाब सिंह श्योराण कार्यवाहक प्रधान बनाए गए। इसके 4 महीने बाद हुए प्रधान के चुनाव में इंद्रसेन गोयल एक बार फिर बाजी मारने में सफल रहे।

नए पालिका चुनाव के बाद 9 दिसंबर 1991 को ताराचंद जिंदल को प्रधान चुना गया लेकिन उन्हें 7 महीने बाद ही हटा दिया गया। करीब एक महीना बिशन दास कार्यवाहक प्रधान रहे और उसके बाद ईश्वर सिंह को प्रधान चुना गया। इन्हें भी 1 साल बाद हटा दिया गया और पवन कुमार कार्यवाहक प्रधान बने। 4 महीने बाद ताराचंद जिंदल को एक बार फिर प्रधान चुना गया। वह 3 महीने से भी कम इस पद पर रह पाए। इसके बाद सुनील कुमार को प्रधान चुना गया और वह भी करीब सवा साल इस पद पर रहने के बाद उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटा दिया गया। इसके बाद रघुवीर सैनी को कार्यवाहक प्रधान बनाया गया और 6 दिसंबर 1996 को ज्ञानचंद प्रधान चुने गए। वह करीब पौने दो साल इस पद पर रहे। उसके बाद सज्जन कुमार गर्ग को प्रधान बनाया गया जो 9 महीने इस पद पर रहे।
वर्ष 2000 में प्रदेश में ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनने के बाद हुए पालिका चुनाव के बाद तेजेंद्र कौर को 18 मई 2000 को प्रधान चुना गया। वह अपना कार्यकाल पूरा करने वाली पहली प्रधान बनी। तेजिंदर कौर जींद नगर परिषद की पहली महिला प्रधान थीं।
2005 में सत्ता परिवर्तन के बाद विनोद आशरी प्रधान बने लेकिन वह करीब 11 महीने इस पद पर रहे। इसके बाद रजनी अरोड़ा करीब एक महीना कार्यवाहक प्रधान के रूप में रही। इसके बाद नरेंद्र नाडा प्रधान बने और वह करीब डेढ़ साल इस पद पर रहे। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद रजनी अरोड़ा एक बार फिर कार्यवाहक प्रधान बनी और करीब 5 महीने उन्होंने जींद नगर परिषद को संभाला। सुनील कुमार इसके बाद प्रधान बने और 5 महीने में ही उन्हें हटा दिया गया और रजनी अरोड़ा एक बार फिर कार्यवाहक प्रधान बनी लेकिन इस बार उनकी टर्म केवल 12 दिन रही। इसके बाद विनोद आशरी फिर से प्रधान बने।
वर्ष 2010 में हुए पालिका चुनाव के बाद सुदेश देवी प्रधान बनी वह 2 साल 1 महीना इस पद पर रही। इसके बाद करीब साढ़े चार महीने हरफूल सैनी ने कार्यवाहक प्रधान के रूप में काम किया। इसके बाद श्रीमती मुकेश प्रधान चुनी गई।
इसके बाद प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और पहली बार भाजपा की सरकार बनी। भाजपा सरकार बनने के बाद हुए पालिका चुनाव में पूनम सैनी को नगर परिषद की प्रधान चुना गया। उन्होंने भी अपना कार्यकाल पूरा किया। पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी भाजपा के नेता हैं। पूनम सैनी के कार्यकाल के दौरान (वर्ष 2020-2021 में) उनके खिलाफ बागी पार्षदों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। हालांकि, पार्षदों का कोरम पूरा न होने और समर्थन मिलने के कारण उनकी कुर्सी सुरक्षित रही थी और वोटिंग टल गई थी।
इसके बाद वर्ष 2022 में नगर पालिका और नगर परिषद में अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष होने लगा और जींद में डॉक्टर अनुराधा सैनी भाजपा की टिकट पर जींद नगर परिषद की चेयर पर्सन चुनी गई। उन्होंने भी अपना कार्यकाल लगभग पूरा कर लिया है और अब इसमें केवल 8 महीने का समय बचा है। अगर कोई बहुत बड़ी राजनीतिक उठा पटक न हो तो उनके कार्यकाल के पूरा होने में कोई दिक्कत नहीं नजर आती।
जींद को पहली महिला प्रधान 13 साल बाद मिली थी और अब तक तेजेंद्र कौर, रजनी अरोड़ा, सुदेश देवी, श्रीमती मुकेश, पूनम सैनी और डॉक्टर अनुराधा सैनी के रूप में 6 महिलाएं जींद नगर परिषद पर राज कर चुकी हैं। इनमें से केवल तीन महिलाएं तेजेंद्र कौर, पूनम सैनी और डॉक्टर अनुराधा सैनी ही कार्यकाल पूरा कर पाई हैं। जींद नगर परिषद में एक भी पुरुष अब तक अपने कार्यकाल को पूरा नहीं कर पाया है। इनमें केवल रजनी अरोड़ा ही ऐसी महिला रही है जिन्होंने तीन बार जींद नगर परिषद में प्रधान का कार्यभार संभाला। यह अलग बात है कि इन तीन बार में मिलाकर भी वह पूरा 1 साल अध्यक्ष नहीं रह सकी।
पिछले 40 सालों में जींद नगर परिषद में कुल मिलाकर 27 प्रधान देखे हैं। इनमें सबसे ज्यादा तीन बार रजनी अरोड़ा प्रधान बनी। इंद्रसेन गोयल, ताराचंद जिंदल, सुनील कुमार, विनोद आशरी को दो-दो बार प्रधान बनने का अवसर मिला।
