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पोषाहार राशि में देरी से 1,190 आंगनबाड़ी केंद्रों पर संकट, बच्चों का भोजन और THR वितरण ठप

जिले के सातों प्रखंडों में संचालित 1,190 आंगनबाड़ी केंद्र इन दिनों वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। जून माह की पोषाहार राशि जारी नहीं होने और सरकारी आवंटन में तकनीकी विलंब के कारण केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाला गर्म पका भोजन पूरी तरह बंद हो गया है। इसके साथ ही गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को दिए जाने वाले टेक होम राशन (THR) का वितरण भी रुक गया है। जुलाई के 12 दिन बीत जाने के बावजूद केंद्रों तक राशि नहीं पहुंचने से पोषण कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

98 हजार से अधिक बच्चों और 53 हजार महिलाओं पर असर

जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 98,578 पंजीकृत बच्चों को प्रतिदिन निर्धारित मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं 53,782 गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पूरक पोषाहार दिया जाना तय है। लेकिन राशि नहीं मिलने से कई केंद्रों पर बच्चे बिना भोजन किए लौट रहे हैं, जबकि कुछ केंद्र नियमित रूप से खुल भी नहीं पा रहे हैं। इससे बच्चों की उपस्थिति में भी गिरावट दर्ज की जा रही है और कुपोषण मुक्त बिहार अभियान पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पोषाहार राशि में देरी से 1,190 आंगनबाड़ी केंद्रों पर संकट, बच्चों का भोजन और THR वितरण ठप

तकनीकी देरी बनी मुख्य वजह

विभागीय व्यवस्था के अनुसार पोषण ट्रैकर ऐप पर बच्चों और लाभार्थियों की उपस्थिति तथा फोटो अपलोड होने के बाद ही पोषाहार मद की राशि जारी की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी कारणों से इस प्रक्रिया में देरी हुई, जिसके कारण भुगतान समय पर नहीं हो सका। वहीं कई परियोजनाओं में सीडीपीओ के तबादले और नए अधिकारियों के कार्यभार नहीं संभालने से प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हुए हैं।

मानदेय लंबित होने से सेविकाओं में नाराज़गी

आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं का कहना है कि कई महीनों से उनका मानदेय भी लंबित है, जिससे आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। आंगनबाड़ी सेविका संघ की नेत्री नूतन कुमारी ने बताया कि जून माह की पोषाहार राशि अब तक जारी नहीं हुई है और मानदेय भुगतान में भी लगातार देरी हो रही है। उनका कहना है कि समय पर राशि उपलब्ध नहीं होने से बच्चों और लाभार्थियों को मिलने वाली आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

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