
हरियाणा की अनाज मंडियों में चल रहे खरीद सीजन के दौरान पैदा हुई अव्यवस्थाओं को लेकर सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे सीजन में किसान, व्यापारी और मंडी मजदूर लगातार परेशान हो रहे हैं। कहीं पर फसल की खरीद प्रभावित है तो कहीं पर उठान की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। उनके अनुसार यह स्थिति सरकार की अधूरी तैयारियों का साफ संकेत है।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
सांसद सैलजा ने कहा कि सरकार की ओर से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ जैसे डिजिटल पोर्टल के जरिए सभी आंकड़े उपलब्ध होने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो फसल उत्पादन के सही आंकड़े उपलब्ध हैं और न ही मंडियों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसका सीधा असर खरीद प्रक्रिया और किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मंडियों में उठान व्यवस्था चरमराई, मजदूरों और ट्रकों की भारी कमी
कुमारी सैलजा ने कहा कि मंडियों में सबसे बड़ी समस्या उठान व्यवस्था की है। कई जिलों में जिन ठेकेदारों को फसल उठान का जिम्मा दिया गया है, उनकी ओर से गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। सरकार इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रही है। इसके अलावा ट्रकों की कमी के कारण अनाज का समय पर उठान नहीं हो पा रहा है। वहीं मजदूरों की कमी के चलते गेहूं की सफाई, भराई और सिलाई जैसी जरूरी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
किसानों की समस्या बढ़ी, सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग
मंडी व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण किसानों को अपनी फसल बेचने और भुगतान प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर अनाज खुले में पड़ा है, जिससे उसकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि वह तत्काल प्रभाव से मंडी व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है तथा पूरी खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो जाएगी।
