
मध्य प्रदेश के दमोह जिले से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है जिसने स्थानीय राजनीति को हिला कर रख दिया है। यहां युवक कांग्रेस से जुड़े एक पदाधिकारी पर एक महिला ने दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे जिले में सनसनी फैल गई है और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मामला बड़ापुरा क्षेत्र का बताया जा रहा है जहां पीड़िता ने सीधे पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है। घटना के बाद कांग्रेस संगठन की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं और विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो गए हैं।
पीड़िता की शिकायत पर युवक कांग्रेस पदाधिकारी पर एफआईआर दर्ज
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने युवक कांग्रेस के दमोह विधानसभा अध्यक्ष जितेंद्र अहिरवार के खिलाफ दुष्कर्म समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को अभिरक्षा में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। सिटी कोतवाली पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच की जाएगी और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। इस घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण माहौल देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया से शुरू हुई दोस्ती और फिर गंभीर आरोप
जानकारी के अनुसार पीड़िता और आरोपी के बीच पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत और दोस्ती थी लेकिन समय के साथ संबंधों में बदलाव आने लगा। महिला का आरोप है कि करीब दो साल पहले आरोपी ने उसे बहाने से एक स्थान पर बुलाया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी द्वारा धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके। डिजिटल सबूत और कॉल डिटेल्स भी खंगाले जा रहे हैं।
राजनीतिक माहौल गर्म जांच के बीच बढ़ा दबाव
इस मामले के सामने आने के बाद दमोह की राजनीति में भी गर्माहट बढ़ गई है। कांग्रेस नेता पर लगे आरोपों को लेकर विपक्ष सरकार और संगठन दोनों पर सवाल उठा रहा है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। आरोपी से लगातार पूछताछ जारी है और पुलिस सभी पहलुओं को गंभीरता से देख रही है। इस घटना ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गंभीर बहस को जन्म दे दिया है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी कितनी अहम होती है।
