
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस में वृद्धि के निर्णय का पूरे अधिवक्ता समुदाय ने स्वागत किया है। इस फैसले को लेकर राज्य के महाधिवक्ताओं और पैनल वकीलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल आर्थिक सुधार नहीं बल्कि न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
लंबे समय से चली आ रही मांग हुई पूरी
सरकारी वकीलों द्वारा यह मांग पिछले कई वर्षों से उठाई जा रही थी कि बदलते समय और बढ़ते मुकदमों के दबाव को देखते हुए फीस संरचना में संशोधन जरूरी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि जनपद न्यायालयों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक सरकार का पक्ष रखने वाले वकीलों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनकी लंबे समय से लंबित अपेक्षाओं को पूरा करता है।

सभी स्तरों के अधिवक्ताओं को मिलेगा लाभ
इस निर्णय का लाभ केवल उच्च स्तरीय अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जिला शासकीय अधिवक्ता, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक अधिवक्ता, नामित अधिवक्ता और न्याय मित्रों तक सभी को मिलेगा। इसके साथ ही हाई कोर्ट इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ और सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत महाधिवक्ता और पैनल अधिवक्ता भी इस फैसले से लाभान्वित होंगे। इससे सरकारी मामलों की पैरवी और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
10 से 14 साल बाद हुआ बड़ा संशोधन और 50 प्रतिशत बढ़ोतरी
अधिवक्ताओं ने कहा कि करीब 10 से 14 वर्षों के बाद इस तरह का बड़ा संशोधन किया गया है जो सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रिटेनरशिप और प्रति सुनवाई फीस में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इससे अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और राज्य सरकार के मामलों की न्यायालयों में और मजबूत पैरवी सुनिश्चित हो सकेगी।
