मंगला एक्सप्रेस में 15-20 स्कूली बच्चों की अचानक बिगड़ी तबीयत, खंडवा में एक घंटे रोकी गई ट्रेन

दिल्ली से केरल जा रही मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में देर रात अचानक अफरा-तफरी मच गई। ट्रेन में सफर कर रहे कई स्कूली बच्चों को खाना खाने के बाद पेट दर्द, उल्टी और घबराहट की शिकायत हुई। खंडवा में ट्रेन रोककर बच्चों का तत्काल इलाज कराया गया।
ट्रेन में अचानक बिगड़ी बच्चों की तबीयत
शुक्रवार देर रात मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस (12618) अपने नियमित सफर पर थी। ट्रेन हजरत निजामुद्दीन से एर्नाकुलम, कोच्चि की ओर जा रही थी। इसी दौरान ट्रेन में मौजूद एक मिशनरी स्कूल के 15 से 20 छात्रों की तबीयत अचानक खराब होने लगी।
बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और घबराहट की शिकायत की। एक साथ कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों में चिंता बढ़ गई।
खाना खाने के बाद सामने आई परेशानी
बताया जा रहा है कि बच्चों ने ट्रेन की पेंट्री कार से खाना खाया था। भोजन के बाद कुछ ही समय में कई बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस होने लगी। इसी वजह से शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई।
हालांकि, बच्चों की तबीयत खराब होने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए भोजन और अन्य संभावित कारणों की जांच जरूरी होगी।

खंडवा में करीब एक घंटे रोकी गई ट्रेन
बच्चों की हालत को देखते हुए मंगला एक्सप्रेस को मध्य प्रदेश के खंडवा रेलवे स्टेशन पर देर रात रोका गया। जिला प्रशासन ने रेलवे के साथ समन्वय कर स्टेशन पर ही इलाज की व्यवस्था की।
बच्चों को अस्पताल ले जाने की तैयारी भी की गई थी, लेकिन मौके पर पहुंचे डॉक्टरों ने स्टेशन पर ही उनकी जांच कर प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया। इससे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी और बच्चों को अनावश्यक रूप से कहीं और ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
स्टेशन पर जुटे अधिकारी और स्वास्थ्य टीम
घटना की सूचना मिलते ही सीएसपी अभिनव वारंगे, सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर और सिविल सर्जन अनिरुद्ध कौशल सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। रेलवे के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने भी उपचार में सहयोग किया।
डॉक्टरों ने बच्चों की स्थिति पर निगरानी रखी। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें ट्रेन में ही रखा गया और रेलवे के डॉक्टर व कर्मचारी बच्चों के साथ भुसावल की ओर रवाना हुए।
फिलहाल बच्चों की हालत नियंत्रण में
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी प्रभावित बच्चों की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। घटना के बाद खंडवा स्टेशन पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल जरूर रहा, लेकिन समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से स्थिति संभाल ली गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बच्चों की तबीयत किस वजह से बिगड़ी। भोजन से फूड पॉइजनिंग हुई या कोई अन्य कारण था, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
रेलवे के खाने की गुणवत्ता पर फिर सवाल
यह घटना ट्रेन में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और उसकी निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े करती है। खासकर जब एक साथ कई स्कूली बच्चों की तबीयत खराब हो, तो मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
बच्चों का सुरक्षित इलाज प्राथमिकता है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि घटना की वजह सामने आए और अगर भोजन जिम्मेदार पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय हो। क्योंकि रेल यात्रा में भरोसा सिर्फ समय पर पहुंचने का नहीं, सुरक्षित भोजन और सुरक्षित सफर का भी होना चाहिए।
