प्रधानमंत्री की जन्मदिवस से शुरू होने वाले सेवा माह में 3 दिन चलेगा आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम

Rural Family Outreach: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस से एक महीना चलने वाले सेवा माह कार्यक्रम में सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में आंगन मिलन कार्यक्रम का आयोजन करेगी। इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ग्रामीण परिवारों के बीच संपर्क और तेज करने तथा ग्रामीण परिवारों को सरकार की नीतियों से अवगत करवाने और किन लोगों को किन नीतियों का लाभ मिला है इस बात को सुनिश्चित करने का काम करेगी।
तीन दिन चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के गांवों में आंगनवाड़ी केंद्रों का पूरा माहौल बदला दिखाई देने वाला है। जहां आम दिनों में बच्चों के पोषण, प्री-स्कूल गतिविधियों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं का काम होता है। वहीं इन तीन दिनों में बच्चों और माताओं के साथ गांव के दूसरे परिवार भी यहां जुटेंगे। कोई सरकारी योजना की जानकारी लेगा, कोई स्वास्थ्य और पोषण पर अपनी बात रखेगा और जिन परिवारों को योजनाओं का लाभ मिला है, वे बताएंगे कि उससे उनकी जिंदगी में क्या बदला। यानी आंगनवाड़ी केंद्र तीन दिन के लिए गांव और सरकार के बीच संवाद की साझा जगह बनेगा।
इस अभियान को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने चंडीगढ़ में विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को इस आयोजन को जन-जन तक पहुंचाने और अधिक से अधिक लोगों को इसमें जोड़ने के निर्देश दिए। प्लानिंग के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 25,962 कार्यशील आंगनवाड़ी केंद्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ अभियान आयोजित किया जाएगा।

इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों की भूमिका को केवल पोषण और बाल देखभाल तक सीमित रखने के बजाय उन्हें गांव में जागरूकता, संवाद और सामुदायिक भागीदारी के केंद्र के रूप में इस्तेमाल करना है। खास बात यह है कि इसके लिए अलग से कोई नया ढांचा या आयोजन स्थल तैयार नहीं किया जा रहा। जिस केंद्र से गांव के परिवार पहले से जुड़े हैं, उसी को तीन दिन के लिए व्यापक संवाद का मंच बनाया जाएगा।
इस पहल में आंगनवाड़ी को किसी नए सरकारी केंद्र में बदलने के बजाय उसकी पहले से मौजूद पहुंच का इस्तेमाल व्यापक ग्रामीण संवाद के लिए किया जा रहा है। गांव के बच्चों और माताओं से शुरू होने वाला यह संपर्क तीन दिनों में परिवारों और लाभार्थियों तक फैलाया जाएगा। यही वजह है कि ‘आंगन मिलन सेवा’ को महज एक कार्यक्रम के बजाय आंगनवाड़ी केंद्र को गांव की साझा संवाद-स्थली बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
परिवारों की बात भी सुनी जाएगी
अभियान में माताओं और परिवारों को संतुलित आहार, पोषण, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, टीकाकरण, एनीमिया की रोकथाम और बच्चों की वृद्धि की निगरानी से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण से संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा। लेकिन कार्यक्रम सिर्फ जानकारी बांटने तक सीमित नहीं रहेगा। जिन महिलाओं ने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है, वे अपने अनुभव साझा करेंगी। इससे गांव के दूसरे परिवारों को यह समझने का मौका मिलेगा कि किसी योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया क्या रही और उससे उनके जीवन में किस तरह का बदलाव आया।
आंगनवाड़ी बनेंगी खेल और रचनात्मकता की जगह
तीन दिनों में बच्चों को भी कार्यक्रम का सक्रिय हिस्सा बनाया जाएगा। उनके लिए खेल, चित्रकला, रंग भरने, कहानी सुनाने, कविता, गीत और छोटी प्रस्तुतियां होंगी। बच्चों की गतिविधियों के बीच फल और मिठाई का वितरण भी किया जाएगा। इससे आंगनवाड़ी में होने वाली रोजमर्रा की गतिविधियों को सामुदायिक आयोजन का रूप मिलेगा और बच्चों के साथ आने वाले परिवार भी इसमें शामिल होंगे।
गांव की जरूरतों पर बातचीत का मौका
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और परिवारों के बीच जो रोज का संपर्क है, उसे व्यापक संवाद में बदला जाए। माताओं से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर बात होगी तो महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी भी साझा होगी। लाभार्थियों के अनुभव दूसरे परिवारों तक पहुंचेंगे। इस तरह सरकारी योजनाओं की जानकारी एकतरफा सूचना के बजाय गांव के भीतर आपसी बातचीत का विषय बनेगी।
148 ब्लॉक, चार चरण और 25,962 केंद्र
प्रदेश के 148 ब्लॉकों को चार चरणों में अभियान से जोड़ा जाएगा। पहले चरण में 40, दूसरे में 40, तीसरे में 36 और चौथे में 32 ब्लॉक शामिल होंगे। लक्ष्य प्रदेश के सभी 25,962 कार्यशील आंगनवाड़ी केंद्रों तक अभियान की पहुंच सुनिश्चित करना है। आयोजन की तस्वीरें विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी और प्रगति की रिपोर्ट भी तैयार होगी। अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रधानमंत्री की ओर से प्रशंसा प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
