केंद्रीय मंत्री का बड़ा दावा रीसाइक्लिंग और कार्बन क्रेडिट से बदलेगी अर्थव्यवस्था

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि रीसाइक्लिंग अब केवल बड़े औद्योगिक घरानों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि यह स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों के लिए भी एक मजबूत आर्थिक इंजन के रूप में उभर रही है। उन्होंने आरईसीईआइसी ग्लोबल सिम्पोजियम को संबोधित करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी ने पूरी वैल्यू चेन में बदलाव के नए अवसर पैदा किए हैं। उनके अनुसार यह बदलाव भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है और रोजगार सृजन के नए रास्ते खोल सकता है।
कचरे को संसाधन मानने की नई सोच पर जोर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कचरे को बोझ नहीं बल्कि एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कचरे को सही तरीके से प्रबंधित किया जाए तो यह आर्थिक विकास का बड़ा स्रोत बन सकता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ई-वेस्ट और कबाड़ के व्यवस्थित निपटान से पिछले पांच वर्षों में 4000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक और स्टील स्लैग के उपयोग तथा प्रयुक्त कुकिंग ऑयल से बायोफ्यूल बनाने जैसे उदाहरण भी दिए जो वेस्ट से वेल्थ के सिद्धांत को मजबूत करते हैं।

ईपीआर ढांचा और डिजिटल निगरानी से मजबूत हो रही व्यवस्था
इस कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव नीलेश साह ने बताया कि भारत का एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी यानी ईपीआर ढांचा काफी प्रभावी साबित हो रहा है। इस प्रणाली के तहत अब तक 75000 से अधिक उत्पादक और 5000 रिसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एक अप्रैल 2026 से लागू संशोधित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों ने डिजिटल निगरानी को और मजबूत कर दिया है जिससे अपशिष्ट प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ी है। यह प्रणाली पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रही है।
जैविक प्रणालियों और कार्बन क्रेडिट पर जोर
कार्यक्रम में बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि रासायनिक प्रक्रियाओं के स्थान पर जैविक प्रणालियों को अपनाना समय की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग इकोसिस्टम को विकसित करने पर भी जोर दिया जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक लाभ भी मिल सके। इस अवसर पर आरईसीईआरसी और फिक्की द्वारा कपड़ा और रासायनिक उद्योग में सर्कुलर इकोनॉमी पर दो ज्ञान पत्र जारी किए गए तथा नवाचार करने वाले संगठनों को सम्मानित भी किया गया।
