
आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को एक बड़े राजनीतिक झटके का सामना करना पड़ा, जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दावा किया कि उनके साथ पार्टी के छह अन्य सांसद भी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अब आम आदमी पार्टी पहले जैसी नहीं रही है और इसके भीतर मूल विचारधारा कमजोर पड़ चुकी है। इस घटनाक्रम ने विपक्षी राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
केजरीवाल का पलटवार
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ अन्याय किया है। केजरीवाल का यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्रीय भावनाओं को जोड़ता है। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी दलों को कमजोर करने के लिए लगातार राजनीतिक दबाव की रणनीति अपना रही है।

संजय सिंह का आरोप
आप सांसद संजय सिंह ने भी इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत विपक्षी दलों के सांसदों को तोड़ने का खेल चल रहा है। संजय सिंह ने दावा किया कि ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ समय पहले अशोक मित्तल के यहां ईडी की कार्रवाई हुई थी और उसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले, जिससे संदेह और गहरा गया है।
राघव चड्ढा का बयान और राजनीतिक भविष्य पर सवाल
राघव चड्ढा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों से खुद को इसलिए अलग किया क्योंकि वे किसी गलत प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास दो ही विकल्प थे या तो राजनीति छोड़ दें या फिर सकारात्मक राजनीति की दिशा में आगे बढ़ें। उनके अनुसार, राज्यसभा के कई सांसद अब बीजेपी के साथ जुड़ने की तैयारी में हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के भविष्य और उसकी आंतरिक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण और भी बदल सकते हैं।
