
भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाराष्ट्र के नागपुर में 10000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना केवल एक औद्योगिक निवेश नहीं, बल्कि देश की रणनीतिक ताकत और तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास है। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे।
रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र को मिलेगा लाभ
अंबाझरी स्थित यंत्र इंडिया लिमिटेड के आयुध निर्माण परिसर में स्थापित होने वाला यह प्लांट रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम कॉम्पोनेंट्स तैयार करेगा। अभी तक ऐसे कई महत्वपूर्ण उपकरणों और सामग्रियों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था। नई परियोजना इस निर्भरता को कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
बदलती सोच का प्रतीक
भूमि पूजन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परियोजना भारत की बदलती सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश को अपनी जरूरतों के लिए विदेशों की ओर देखना पड़ता था, लेकिन आज वही उत्पाद देश में ही भारतीय तकनीक और भारतीय विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किए जा रहे हैं। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करता है।

युद्धकाल में आत्मनिर्भरता की अहमियत
राजनाथ सिंह ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया में युद्ध या संकट की स्थिति बनती है तो सप्लाई चेन प्रभावित होती है। ऐसे समय में वही देश मजबूत स्थिति में रहता है जो अपनी रक्षा जरूरतों को स्वयं पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता केवल उत्पादन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मविश्वास का भी प्रतीक है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं रक्षा निर्यात भी 1 हजार करोड़ रुपये से कम से बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार ने अगले कुछ वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
नागपुर में शुरू हुई यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। जब देश अपनी रक्षा जरूरतों को स्वयं पूरा करने लगता है, तब उसका आत्मविश्वास भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। यह पहल भविष्य के भारत को अधिक सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
