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CWC बैठक से क्यों दूर रहे चरणजीत चन्नी? सामने आई पंजाब यूनिवर्सिटी परीक्षा की वजह

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के शामिल नहीं होने की चर्चा तेज थी। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब इसके पीछे की वजह सामने आ गई है।

चन्नी ने बताया कि वह पंजाब यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में व्यस्त हैं, इसलिए वह बैठक में शामिल नहीं हो सके।

लोक प्रशासन में कर रहे हैं मास्टर डिग्री

चरणजीत सिंह चन्नी ने बताया कि वह फिलहाल लोक प्रशासन (Public Administration) में मास्टर डिग्री की अंतिम परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा और शोध उनके लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। इससे पहले वह पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से राजनीति विज्ञान में पीएचडी भी कर चुके हैं।

अब उनका ध्यान सार्वजनिक नीति सुधार और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर है।

प्रशासनिक सुधारों पर करना चाहते हैं काम

चन्नी ने कहा कि उनका लक्ष्य पंजाब सरकार के प्रशासन और नीतिगत सुधारों के क्षेत्र में शोध करना है।

उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यावहारिक सुधारों पर काम करना चाहते हैं, जिनसे प्रशासनिक दक्षता, सुशासन, बेहतर नीति निर्माण और आम जनता तक सरकारी सेवाओं की पहुंच मजबूत हो सके।

उनके अनुसार, मजबूत संस्थागत व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन पंजाब के विकास के लिए जरूरी हैं।

पंजाब कांग्रेस में जारी है अंदरूनी खींचतान

चरणजीत सिंह चन्नी का CWC बैठक से दूर रहना ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी विवाद लगातार चर्चा में है।

CWC बैठक से क्यों दूर रहे चरणजीत चन्नी? सामने आई पंजाब यूनिवर्सिटी परीक्षा की वजह

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी में गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और चन्नी समर्थकों के बीच मतभेद की बातें भी सामने आई हैं।

नेताओं के बीच बढ़ी राजनीतिक दूरी

पंजाब कांग्रेस प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ पोस्टर लगाए जाने का मामला भी पार्टी के अंदर चल रहे विवाद को उजागर करता है।

ऐसे समय में चन्नी का राजनीतिक बैठकों से ज्यादा अपने अकादमिक काम पर ध्यान देना भी चर्चा का विषय बन गया है।

चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती

पंजाब में आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं। पार्टी को जहां संगठन को मजबूत करने की जरूरत है, वहीं अंदरूनी मतभेदों को खत्म करना भी जरूरी होगा।

अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में गुटबाजी को कैसे संभालता है और चुनावी तैयारियों को किस दिशा में आगे बढ़ाता है।

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