
बलिया के रसड़ा से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह को शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। खराब मौसम और हल्की बारिश के बावजूद उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। राजनीतिक दलों की सीमाएं टूटती नजर आईं और समर्थकों के साथ अलग-अलग दलों के नेता भी शोक में शामिल हुए। गंगा तट पर अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा।
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
उमाशंकर सिंह का पार्थिव शरीर गुरुवार रात बलिया के नगरा थाना क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव खनवर पहुंचा था। शुक्रवार को अंतिम यात्रा श्रीरामपुर घाट पहुंची, जहां गंगा नदी के तट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे प्रिंस यूकेश सिंह ने मुखाग्नि दी।
खराब मौसम के बावजूद उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार को मौसम खराब था और हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी। इसके बावजूद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और आम लोगों की बड़ी भीड़ अंतिम यात्रा में शामिल हुई। लोगों ने नम आंखों से अपने लोकप्रिय विधायक को अंतिम विदाई दी।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के विधायक हंसू राम, पूर्व मंत्री नारद राय और भाजपा जिलाध्यक्ष संजय मिश्र समेत कई प्रमुख लोग शोक व्यक्त करने पहुंचे।

मंत्री दिनेश प्रताप सिंह हुए भावुक
प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। उमाशंकर सिंह उनके समधी थे। इस दौरान वह बेहद भावुक नजर आए और फूट-फूटकर रो पड़े।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उमाशंकर सिंह के इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय भी लगातार उनके स्वास्थ्य और बेहतर इलाज को लेकर संपर्क में था।
‘हर दल के लोग उनके निधन से दुखी हैं’
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उमाशंकर सिंह को किसी एक राजनीतिक दल की सीमा में नहीं बांधा जा सकता। उनके निधन से अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा रखने वाले लोग भी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह के परिवार को दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों की संवेदनाएं मिली हैं।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह का छोटा बेटा एक दिन अपने पिता की तरह बड़ी पहचान बनाएगा।
दिल्ली में हुआ था निधन
उमाशंकर सिंह का बुधवार रात दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था। वह 55 वर्ष के थे और उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक थे। उनके निधन की खबर के बाद बलिया सहित पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
राजनीति में अलग पहचान छोड़ गए उमाशंकर
रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार जनप्रतिनिधि के रूप में सक्रिय रहे उमाशंकर सिंह की पहचान जमीन से जुड़े नेता के तौर पर रही। उनके अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ इस बात का संकेत रही कि उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के दौरान क्षेत्र में एक मजबूत व्यक्तिगत संबंध बनाया था।
गंगा तट पर अंतिम विदाई के साथ उमाशंकर सिंह का राजनीतिक सफर भले थम गया, लेकिन उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी यादें लंबे समय तक बनी रहेंगी।
