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हरियाणा में उद्योग क्रांति क्या नया कानून बदल देगा निवेश का पूरा सिस्टम

हरियाणा सरकार ने राज्य में उद्योग लगाने की प्रक्रिया को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। प्रस्तावित राइट टू बिजनेस एक्ट के तहत अब उद्यमियों को स्व-घोषणा के आधार पर काम शुरू करने की अनुमति मिल सकेगी। शुरुआती चरण में सरकारी निरीक्षणों में भी कमी की जाएगी ताकि उद्योगों को अनावश्यक देरी और जटिल प्रक्रियाओं से राहत मिल सके। इस पहल का उद्देश्य राज्य को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

‘सक्षम’ फंड और औद्योगिक ढांचे का बड़ा अपग्रेड

औद्योगिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपये का ‘सक्षम’ फंड प्रस्तावित किया है। इस फंड का उपयोग पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के आधुनिकीकरण और सुधार में किया जाएगा। इसके साथ ही अपशिष्ट उपचार और अग्नि सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल को अपनाने की योजना है। इस कदम से उद्योगों में सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को बेहतर बनाने के साथ-साथ संचालन लागत को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

हरियाणा में उद्योग क्रांति क्या नया कानून बदल देगा निवेश का पूरा सिस्टम

डी-रेगुलेशन और ओम्निबस बिल से खत्म होगी लालफीताशाही

कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में डी-रेगुलेशन फेज-2 के तहत चल रहे सुधारों की समीक्षा की गई। सरकार अब ‘हरियाणा ओम्निबस बिल’ लाने की तैयारी में है, जो विभिन्न नियमों और प्रक्रियाओं को एकीकृत कानूनी ढांचे में लाएगा। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और अनुपालन का बोझ कम होगा। बैठक में अधिकारियों ने 28 प्राथमिकता वाले सुधार क्षेत्रों की प्रगति पर चर्चा की, जिसका लक्ष्य व्यवसायिक प्रक्रियाओं को तेज और सरल बनाना है।

भूमि, निर्माण और सिंगल विंडो सिस्टम में बड़े सुधार

राज्य में भूमि उपयोग परिवर्तन यानी सीएलयू को भी आसान बनाया जा रहा है। अब 70 प्रतिशत क्षेत्र में सीएलयू की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है और शेष क्षेत्रों में इसे ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए लागू करने की योजना है। निर्माण और संपत्ति से जुड़े नियमों को भी सरल किया जा रहा है, जिसमें कई अनावश्यक एनओसी हटाने का प्रस्ताव शामिल है। इसके साथ ही हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र को सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे सभी अनुमतियां लगभग 30 दिनों के भीतर मिलने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी।

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