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Demolition of encroachments on twin lakes in Katpadi begins

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Demolition of encroachments on twin lakes in Katpadi begins
डब्ल्यूआरडी अधिकारियों ने कहा कि विस्थापित परिवारों को मुफ्त जमीन उपलब्ध कराने के लिए काटपाडी के पास कारीगिरी गांव में एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की गई है।

डब्ल्यूआरडी अधिकारियों ने कहा कि विस्थापित परिवारों को मुफ्त जमीन उपलब्ध कराने के लिए काटपाडी के पास कारीगिरी गांव में एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की गई है।

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क्षेत्र को बच्चों के पार्क और पार्किंग स्थल के रूप में विकसित करने के लिए शनिवार को यहां कटपाडी के पास पुनर्जीवित जुड़वां झीलों – काझिंजुर और धरापदावेदु – पर अतिक्रमण को ध्वस्त करना शुरू हो गया।

जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के अधिकारी, जो जलाशयों के विध्वंस और पुनर्जीवन का कार्य करते हैं, ने कहा कि तीन दिवसीय अभ्यास सोमवार को पूरा हो जाएगा।

अधिकारियों ने कहा कि कुल 287 अवैध संरचनाएं – धरपदावेदु और काझिनजुर झील के आसपास क्रमशः 205 और 82 अवैध संरचनाएं – अतिक्रमित भूमि पर गिरा दी जाएंगी।

बच्चों के पार्क और पार्किंग स्थल जैसी सुविधाएं स्थापित करने के लिए लगभग 25 एकड़ अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त किया जा रहा है। “जुड़वां झीलों का कायाकल्प लगभग पूरा हो चुका है। एक बार ध्वस्त होने के बाद, भविष्य में अतिक्रमण को रोकने के लिए इन झीलों के चारों ओर अतिक्रमित स्थान को एक परिसर की दीवार से घेर दिया जाएगा। पूरा काम दिसंबर के अंत तक पूरा हो जाएगा,” आर. रामकुमार, सहायक अभियंता (एई), पीडब्ल्यूडी (काटपाडी) ने बताया द हिंदू.

डब्ल्यूआरडी अधिकारियों ने कहा कि विस्थापित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर मुफ्त जमीन उपलब्ध कराने के लिए कटपाडी के पास कारीगिरी गांव में एक वैकल्पिक स्थल की पहचान की गई है।

मानदंडों के अनुसार, प्रत्येक प्रभावित परिवार दो शर्तों पर अधिकतम तीन सेंट भूमि के लिए पात्र है – कोई नियमित आय नहीं और उनके नाम पर कोई संपत्ति पंजीकृत नहीं है। उनमें से अधिकांश कारीगिरी गांव में वैकल्पिक स्थल पर स्थानांतरित हो रहे हैं।

100 एकड़ में फैली, जुड़वां झीलें एक संकीर्ण चैनल द्वारा अलग की जाती हैं। प्रत्येक झील औसतन 35 एमसीएफटी पानी संग्रहित कर सकती है।

डब्ल्यूआरडी ने ट्विन झीलों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना के तहत 2022 में ₹28.45 करोड़ की लागत से काम शुरू किया। परियोजना के हिस्से के रूप में, जुड़वां जलाशयों को छह मीटर की मूल गहराई तक गाद निकाला गया है। भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए झीलों को भी गहरा किया गया।

दोनों झीलों के चारों ओर टाइलों वाला पैदल पथ बनाया गया है। स्थानीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आने वाले हफ्तों में नौकायन सुविधाएं बनाई जाएंगी।

जलाशयों को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए झीलों के केंद्र में मानव निर्मित द्वीप बनाए गए हैं। ये द्वीप प्रवासी पक्षियों को भी आकर्षित करेंगे। देशी वृक्ष प्रजातियाँ लगाई गई हैं। किसानों और उद्यानिकी विभाग से पौधे निःशुल्क खरीदे गये।

वर्तमान में, कम से कम आठ गांवों के 15,000 से अधिक निवासी उपभोग के लिए इन झीलों पर निर्भर हैं। स्थानीय निकायों ने निवासियों की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इन जलाशयों के बांध के आसपास बोरवेल खोदे।

डब्ल्यूआरडी वेल्लोर में 519 टैंकों में से लगभग 100 और काटपाडी में जुड़वां झीलों सहित कम से कम 24 टैंकों का रखरखाव करता है।

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बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी झटका AIMIM-AJUP गठबंधन खत्म होने से हलचल

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बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी झटका AIMIM-AJUP गठबंधन खत्म होने से हलचल

पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में एक कथित वायरल वीडियो ने बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। यह मामला हुमायूं कबीर से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। सत्तारूढ़ Trinamool Congress ने इस वीडियो को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate से जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि वीडियो में जो दावे किए गए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है और सभी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

AIMIM ने गठबंधन तोड़ने का किया ऐलान

इस विवाद के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP के साथ अपना गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि वह किसी भी ऐसे बयान या विवाद से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे किसी समुदाय की ईमानदारी पर सवाल उठे। AIMIM ने स्पष्ट किया कि वह अब पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी और भविष्य में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। इस फैसले को राज्य की चुनावी रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी झटका AIMIM-AJUP गठबंधन खत्म होने से हलचल

कबीर पर आरोप और AI वीडियो का दावा

इस पूरे मामले में हुमायूं कबीर पर आरोप लगाए गए हैं कि एक कथित वीडियो में उनके बयान सामने आए हैं, जिसे लेकर विवाद बढ़ गया है। हालांकि कबीर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि यह वीडियो एआई जनरेटेड है और उन्हें बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि यह वीडियो फर्जी है और इसका उद्देश्य उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना है। कबीर ने यह भी कहा कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई करेंगे और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि का केस दायर कर सकते हैं। उन्होंने यह भी चुनौती दी है कि कोई यह साबित करे कि उन्होंने ऐसा कोई बयान दिया था।

AJUP और राजनीतिक समीकरणों में बदलाव

हुमायूं कबीर पहले Trinamool Congress से जुड़े हुए थे, लेकिन बाद में उन्हें सस्पेंड किए जाने के बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी AJUP का गठन किया था। इसके बाद उन्होंने AIMIM के साथ चुनावी गठबंधन किया था, जो अब टूट चुका है। कबीर का कहना है कि यह विवाद उन्हें और उनकी पार्टी को कमजोर करने की कोशिश है, क्योंकि राजनीतिक ताकतें मुस्लिम समुदाय के वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं। वहीं AIMIM के अलग होने के बाद बंगाल की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं और आने वाले समय में इसका असर चुनावी परिणामों पर भी देखने को मिल सकता है।

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ओवरटेक विवाद में थार सवारों का हमला, बस स्टाफ पर चाकू और फायरिंग

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ओवरटेक विवाद में थार सवारों का हमला, बस स्टाफ पर चाकू और फायरिंग

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक मामूली ओवरटेक विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और चार लोगों की जान पर बन आई। भवारना थाना क्षेत्र के बैरघट्टा में बुधवार रात बीड़ से दिल्ली जा रही एक निजी वॉल्वो बस को रास्ता न देने पर महिंद्रा थार सवार बदमाशों ने हमला कर दिया। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी सी बहस किस तरह जानलेवा बन सकती है। हमलावरों ने बस को जबरन रुकवाया और चालक परिचालक समेत अन्य लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। इतना ही नहीं दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई।

चार लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती

इस हमले में वॉल्वो बस के चालक सुंदर सिंह और राज कुमार के साथ विजय कुमार और परिचालक प्रवेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को पहले थुरल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए कुछ को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घायलों के बयान के अनुसार हमलावर बेहद आक्रामक थे और उन्होंने बिना किसी चेतावनी के हमला कर दिया। यह घटना यात्रियों और आम लोगों के लिए बेहद डरावनी साबित हुई क्योंकि सड़क पर चल रही बस को इस तरह निशाना बनाना एक गंभीर अपराध माना जा रहा है।

ओवरटेक विवाद में थार सवारों का हमला, बस स्टाफ पर चाकू और फायरिंग

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तुरंत इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी। पुलिस ने बिना नंबर की काली महिंद्रा थार को कब्जे में लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान पंजाब के पठानकोट निवासी बलविंदर सिंह और अलीश तथा होशियारपुर निवासी निशान पाल के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से चाकू और पिस्टल भी बरामद किए हैं जिनका इस्तेमाल हमले और फायरिंग में किया गया था। इसके अलावा वाहन की तलाशी के दौरान नशीला पदार्थ भी बरामद हुआ जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज, जांच जारी

कांगड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है जिसमें हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम शामिल हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों के पास अवैध हथियार और नशीले पदार्थ कहां से आए और क्या उनका कोई पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि सड़क पर बढ़ती आक्रामकता और कानून का डर खत्म होने से समाज में कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो रही है।

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एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान

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एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान

ओडिशा के पुरी जिले के निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजू जनता दल की एक अहम बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब पार्टी के दो गुटों के बीच तीखी झड़प हो गई। यह बैठक बेगुनिया इलाके के जगुलेई पीठ में आयोजित की गई थी जिसका मकसद संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। शुरुआत में माहौल सामान्य था और नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे थे। लेकिन अचानक किसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे तनाव को खुलकर सामने ला दिया है।

धक्का-मुक्की और हाथापाई से बिगड़े हालात

जैसे ही बहस बढ़ी दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। कुछ ही पलों में यह विवाद हाथापाई में बदल गया जिससे बैठक स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि इस दौरान कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो गया और बैठक का उद्देश्य अधूरा रह गया। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं जो कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं।

एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान

दिलीप नायक की गैरमौजूदगी बना विवाद का कारण

सूत्रों के मुताबिक यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेडी के पूर्व विधायक प्रत्याशी दिलीप नायक जेल में हैं और उनकी गैरमौजूदगी में संगठन को संभालने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान सुब्रत छतोई लगातार बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और नेतृत्व को लेकर असहमति इस झड़प की बड़ी वजह मानी जा रही है। यह घटना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

पार्टी की एकता पर उठे सवाल

जगुलेई पीठ में हुई इस घटना के बाद बीजेडी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस बैठक का मकसद संगठन को मजबूत करना था वही बैठक पार्टी के भीतर की कमजोरियों को उजागर कर गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन यह घटना पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि संगठन को एकजुट रखते हुए कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा और संतुलन कायम किया जाए।

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