पंजाब चुनाव से पहले BJP का बड़ा प्लान नायब सैनी को मिली अहम जिम्मेदारी

चंडीगढ़ में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों और पुलिस के बीच शुक्रवार को जबरदस्त टकराव देखने को मिला। संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम के बैनर तले सैकड़ों किसान लोक भवन की ओर कूच कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए चंडीगढ़ पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी। जब किसान बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया। इस दौरान मौके पर अफरा तफरी मच गई और कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। मोहाली बॉर्डर पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
पुलिस और किसानों के बीच बढ़ा तनाव
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पुलिस बैरिकेड हटाने की कोशिश की जबकि पुलिस जवानों ने उन्हें रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को पीछे धकेलने की भी कोशिश की जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगातार वाटर कैनन चलाए और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रशासन ने चंडीगढ़ और मोहाली बॉर्डर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए। पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और आने जाने वाले लोगों की भी जांच की जा रही है।

किसानों की प्रमुख मांगों को लेकर बढ़ा आंदोलन
किसानों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। प्रदर्शनकारी नदी के पानी के बंटवारे को रिपेरियन सिद्धांत के आधार पर लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा पंजाब पुनर्गठन एक्ट की कुछ विवादित धाराओं को रद्द करने की भी मांग उठाई जा रही है। किसान केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन बिल 2025 और बीज कानून 2025 का भी विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि ये कानून किसानों के हितों के खिलाफ हैं और इससे कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
MSP और बिजली पानी की मांग बनी बड़ा मुद्दा
किसानों की सबसे बड़ी मांग सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP की कानूनी गारंटी है। उनका कहना है कि बिना कानूनी सुरक्षा के किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। इसके साथ ही सहकारी समितियों द्वारा रद्द की गई ऋण सीमाओं को फिर से बहाल करने की मांग भी उठाई जा रही है। किसानों ने धान सीजन के दौरान पूरी क्षमता से बिजली और नहरी पानी उपलब्ध कराने की भी मांग की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द बातचीत नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
