
पंजाब की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है जहां आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के सात सांसदों ने बगावती रुख अपनाते हुए पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य का सियासी पारा काफी हाई हो गया है और आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बचाए रखने और विधायकों को एकजुट रखने की है।
संगठन बचाने की कोशिश में जुटे भगवंत मान बड़ा कदम उठाया
इस संकट के बीच भगवंत मान ने संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी अब अपने विधायकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के मिशन में जुट गई है। सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सरकार और संगठन पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। पार्टी की रणनीति है कि लोगों के बीच सरकार के कामकाज को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जाए ताकि जनसमर्थन बना रहे।

जालंधर में बड़ी बैठक 1000 ऑब्जर्वर और विधायक होंगे शामिल
इसी रणनीति के तहत जालंधर में एक बड़ी बैठक आयोजित की जा रही है जिसमें करीब 1000 ऑब्जर्वर और पार्टी विधायक हिस्सा लेंगे। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने और विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही कार्यकर्ताओं को सरकार की उपलब्धियों के प्रचार के लिए दिशा निर्देश दिए जाएंगे। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मनीष सिसोदिया भी शामिल होंगे जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इस संकट को गंभीरता से ले रही है।
डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी सिसोदिया और संजय सिंह पर बढ़ी हलचल
सूत्रों के अनुसार पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को सौंपी है। पार्टी के सांसदों और विधायकों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी संदिग्ध कॉल या गतिविधि की जानकारी तुरंत वरिष्ठ नेताओं को दें। वहीं राघव चड्ढा के पहले दिए गए बयान कि कुछ बड़ा होने वाला है अब चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पार्टी तेजी से सक्रिय हो गई है और आने वाले समय में राजनीतिक हालात और ज्यादा दिलचस्प हो सकते हैं।
