
उत्तराखंड की राजनीति में अपनी सख्त छवि और ईमानदार नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का मंगलवार को निधन हो गया. लंबे समय से बीमार चल रहे खंडूड़ी ने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है और राजनीतिक गलियारों में उन्हें एक युग के अंत के रूप में याद किया जा रहा है. उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो निर्णयों में सख्त और प्रशासन में बेहद अनुशासित माने जाते थे.
राजकीय शोक और अंतिम संस्कार की तैयारियां
राज्य सरकार ने उनके निधन के बाद तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. इसके साथ ही बुधवार को सभी सरकारी कार्यालयों को बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें. उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हरिद्वार में बुधवार को किया जाएगा. सरकार और प्रशासन की ओर से उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ विदाई देने की तैयारी की गई है. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है.

सेना से राजनीति तक का प्रेरणादायक सफर
एक अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे खंडूड़ी ने भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर में लंबी सेवा दी. अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 1982 में अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 1991 में गढ़वाल लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने. इसके बाद वे कई बार संसद पहुंचे और भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख पहाड़ी नेताओं में उनकी मजबूत पहचान बनी. उनका जीवन अनुशासन और राष्ट्र सेवा की मिसाल माना जाता है.
विकास कार्यों और मजबूत प्रशासन के लिए याद किए जाएंगे
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी जहां उनके कार्यकाल को देश में सड़क विकास के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जाता है. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को गति देने में उनकी भूमिका को बेहद अहम माना जाता है. उन्होंने दूरस्थ गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई राह खुली. उनकी प्रशासनिक सख्ती और दूरदृष्टि आज भी एक प्रेरणा के रूप में याद की जाती है और उन्हें एक विकासवादी नेता के रूप में हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा.
