भागलपुर में महिला को ‘डायन’ बताकर पीटने का आरोप, निर्वस्त्र करने की कोशिश; पुलिस के रवैये पर सवाल

बिहार के भागलपुर में अंधविश्वास के नाम पर एक महिला के साथ कथित मारपीट और उसके कपड़े खींचने की कोशिश का मामला सामने आया है। पीड़िता ने गांव के कुछ लोगों पर प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस के महिला से आशीर्वाद लेने के कथित व्यवहार ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।
पचरुखी गांव में महिला के साथ मारपीट का आरोप
भागलपुर जिले के शाहकुंड थाना क्षेत्र के पचरुखी गांव में एक महिला को कथित तौर पर डायन बताकर प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। पीड़िता तारा देवी ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें अपमानित करने की कोशिश की।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने महिला की साड़ी खींचकर उन्हें निर्वस्त्र करने का प्रयास किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। मामले को लेकर महिला ने पुलिस से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।
चार ग्रामीणों पर लगाए गंभीर आरोप
तारा देवी ने अपनी शिकायत में गांव के बसकी राम, बोरी राम, बिजली राम और बबलू राम के नाम लिए हैं। आरोप है कि इन लोगों ने उन्हें डायन कहकर निशाना बनाया और उनके साथ मारपीट की।
पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने गोली चलाने और शरीर में आग लगाने जैसी धमकियां भी दीं। ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं। मामले में आरोपियों का पक्ष और पुलिस की जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

मौके पर पहुंची पुलिस के व्यवहार पर विवाद
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सामने आए विवरण और दावों के मुताबिक, जब शाहकुंड थाने के पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे, तो वे महिला से आशीर्वाद लेते दिखाई दिए। यह भी दावा किया गया कि पुलिसकर्मियों ने वहां मौजूद ग्रामीणों से भी महिला का आशीर्वाद लेने को कहा।
पुलिस के इस कथित व्यवहार को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, मौके पर पुलिसकर्मियों के पहुंचने की परिस्थितियों, उनके व्यवहार और कार्रवाई के बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना जरूरी है।
अंधविश्वास के नाम पर प्रताड़ना गंभीर चिंता का विषय
किसी महिला को डायन बताकर निशाना बनाना अंधविश्वास से जुड़ी गंभीर सामाजिक समस्या है। इस तरह के आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को अपमानित करना, मारपीट करना या धमकाना उसके सम्मान और सुरक्षा के अधिकार पर चोट पहुंचाता है।
ऐसे मामलों में पुलिस की जिम्मेदारी शिकायत की निष्पक्ष जांच करना, पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई करना है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता और पीड़ितों को समय पर मदद मिलना भी जरूरी है।
पीड़िता ने मांगा न्याय, जांच पर टिकी नजरें
तारा देवी ने शाहकुंड थाने में शिकायत देकर अपने साथ हुई कथित घटना पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सुरक्षा की भी गुहार लगाई है। अब मामले में पुलिस की जांच, शिकायत पर की गई कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण का इंतजार है।
निष्कर्ष: भागलपुर की यह घटना अंधविश्वास के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाली कथित हिंसा और ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाती है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है। पुलिस के कथित व्यवहार की भी स्पष्ट जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
