
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव लखनऊ के मलिहाबाद में एक श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने पहुंचे, लेकिन वापसी के दौरान उनका समोसा खाते हुए अंदाज चर्चा में आ गया। इसी दौरे में उन्होंने बीजेपी सरकार, चुनावी निष्पक्षता, वोटर लिस्ट और भ्रष्टाचार को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए।
श्रद्धांजलि सभा से समोसे की दुकान तक पहुंचे अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र से 2022 में प्रत्याशी रहे सोनू कनौजिया के पिता रामगोपाल कनौजिया की तेरहवीं में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। वापसी के दौरान काकोरी में एक समोसे की दुकान पर रुककर उन्होंने समोसा खाया। आगे एक बाइक राइडर से भी मुलाकात की और रास्ते में कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों से बातचीत की। उनका यह सहज अंदाज राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
बीजेपी पर चुनाव में धांधली का आरोप
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने बीजेपी पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर शिक्षकों को डराने-धमकाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की अपील की और अधिकारियों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

वोटर लिस्ट और वॉयस कॉलिंग पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने दावा किया कि वोटर लिस्ट बीजेपी के मंत्रियों और नेताओं तक पहुंच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सूची आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है, तो राजनीतिक नेताओं के पास इसका डेटा कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके लिए किसी कंपनी की सेवाएं ली गई होंगी। साथ ही, उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से संदिग्ध वॉयस कॉलिंग रिकॉर्ड करने और सतर्क रहने की अपील की।
महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर हमला
सपा प्रमुख ने बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की आय के मुद्दे पर भी बीजेपी सरकार को घेरा। उन्होंने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) में भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में बदलाव होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर भी तंज कसा और दावा किया कि जनता 2027 में सरकार बदलने का फैसला कर सकती है।
आजम खान और शिक्षामित्रों का मुद्दा भी उठाया
अखिलेश यादव ने आजम खान के साथ अन्याय होने का आरोप लगाते हुए उन्हें न्याय दिलाने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रयास जारी रखने की बात कही। शिक्षामित्रों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो शिक्षामित्रों को पूर्ण शिक्षक बनाने और सरकारी नौकरी देने की दिशा में काम करेगी। यह बयान चुनाव से पहले शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को सपा की राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल करता है।
2027 से पहले सियासी संदेश देने की कोशिश
अखिलेश यादव का यह दौरा एक तरफ पारिवारिक शोक में शामिल होने और जनता से सहज मुलाकात का अवसर रहा, तो दूसरी तरफ बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक हमले का मंच भी बना। समोसे की दुकान पर रुकने की तस्वीरें भले ही लोगों का ध्यान खींचें, लेकिन चुनावी बहस में असली सवाल निष्पक्ष मतदान, रोजगार, महंगाई और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाबदेही का है। 2027 का चुनाव इन मुद्दों पर जनता के फैसले की अहम परीक्षा होगा।
