
बिहार विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को न तो राजनीति से हटाया जा सकता है और न ही जनता के दिल से। सम्राट चौधरी ने उन्हें इच्छाशक्ति वाला मजबूत नेता बताया और कहा कि उनके फैसले बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले रहे हैं। यह बयान सदन में मौजूद सभी सदस्यों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
नीतीश कुमार के फैसलों को बताया निर्णायक
सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि जब नीतीश कुमार ने सत्ता हस्तांतरण का निर्णय लिया, तब यह कई लोगों के लिए आश्चर्य का विषय था। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लंबे समय से राजनीति और मुख्यमंत्री पद पर सक्रिय रहे हैं, लेकिन उनके निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अलग बनाती है। सम्राट चौधरी ने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें खुद भी पहले यह समझ नहीं आता था कि राजनीतिक घटनाएं किस दिशा में जा रही हैं, लेकिन बाद में परिस्थितियां स्पष्ट हो गईं।

सुशासन, विकास और योजनाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में सुशासन स्थापित करने का श्रेय नीतीश कुमार को जाता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दो दशकों में एनडीए सरकार ने बिहार में विकास और स्थिरता की नींव रखी है। सम्राट चौधरी ने महिलाओं के उत्थान, शिक्षा सुधार और रोजगार योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि साइकिल योजना जैसी पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य एक करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना है।
विपक्ष पर निशाना और सुशासन जारी रखने का संकल्प
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी अप्रत्यक्ष रूप से टिप्पणी की और कहा कि सत्ता किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता का विश्वास ही सरकार की असली ताकत है। सम्राट चौधरी ने दोहराया कि राज्य में सुशासन को और मजबूत किया जाएगा और महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करेगा तो सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। उनके इस बयान ने सदन में राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर दिया।
