
मध्य प्रदेश के सागर जिले में गेहूं खरीदी प्रक्रिया के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने किसानों और प्रशासन दोनों को हैरान कर दिया है। किसानों की मेहनत से उपजाए गए गेहूं की खरीदी के नाम पर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। मामला सामने आने के बाद प्रदेश के खाद्य. नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि खरीदी केंद्र से जुड़े वेयरहाउस में रखी गई कई बोरियों में गेहूं की जगह भारी मात्रा में मिट्टी और कंकड़ भर दिए गए थे। यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि किसानों के विश्वास और सरकारी व्यवस्था की साख पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। जैसे ही शिकायत की पुष्टि हुई वैसे ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हो गया।
जांच में खुली पोल, सैकड़ों बोरियों में मिला मिट्टी और कंकड़
यह मामला सागर जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के देव प्रभाकर हाउस वेयरहाउस से जुड़ा है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जब प्रारंभिक जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि करीब 600 बोरियों में 30 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक मिट्टी और कंकड़ भरे हुए थे। कई बोरियों में गेहूं नाममात्र का मिला जबकि अधिकांश हिस्सा मिट्टी से भरा हुआ था। इस खुलासे ने सरकारी खरीदी व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला सुनियोजित गड़बड़ी और लापरवाही का प्रतीत होता है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका रही और आखिर इतनी बड़ी मात्रा में यह गड़बड़ी कैसे हो गई।

मंत्री के सख्त निर्देश के बाद अधिकारियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रशासन को तत्काल और कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वहीं जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल को सागर जिले के प्रभार से हटाकर भोपाल मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने साफ कहा है कि केवल खाद्य विभाग ही नहीं बल्कि उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े हर विभाग और कर्मचारी की भूमिका की जांच की जाएगी। यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि किसानों के हितों के साथ किसी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दोषियों को नहीं मिलेगी राहत, निगरानी व्यवस्था होगी और मजबूत
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का धोखा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों की मेहनत और अधिकारों पर चोट पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है लेकिन यदि कोई अधिकारी. संस्था या समूह भ्रष्टाचार अथवा लापरवाही में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। इस घटना के बाद सरकार ने उपार्जन केंद्रों और वेयरहाउसों की निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में प्रदेशभर में खरीदी केंद्रों का विशेष निरीक्षण अभियान भी चलाया जा सकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और किसानों का भरोसा कायम रखा जा सके।
