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सौरव दास-आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर CJP का बड़ा आरोप, रत्ना सिंह ने पुलिस पर उठाए सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत को लेकर विवाद बढ़ गया है। CJP ने दोनों की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर सुनवाई में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया है। पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

जंतर-मंतर मामले में हुई थी गिरफ्तारी

सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर में कथित तौर पर जबरन प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। बताया गया कि दोनों ने वहां लगे बंद दरवाजों को पार करके परिसर में प्रवेश किया था।

दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया और अगले दिन 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद उनकी रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

अभिजीत दीपके ने लगाया देरी का आरोप

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रशासन दोनों नेताओं की हिरासत लंबी खींचने के लिए अदालत की कार्यवाही में देरी कर रहा है।

उनका दावा है कि दोनों को जेल में रखने का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है और इसी वजह से उनकी रिहाई रोकने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं।

रत्ना सिंह ने भी पुलिस पर साधा निशाना

CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी दिल्ली पुलिस और सरकारी अभियोजन पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, सरकारी अभियोजक कई दिनों तक सुनवाई में पेश नहीं हुए, लेकिन जिस दिन दोनों नेताओं की रिहाई पर विचार होना था, उसी दिन वे अदालत पहुंचे।

रत्ना सिंह का आरोप है कि इसके बाद कार्यवाही को मजिस्ट्रेट को मिले कथित धमकी भरे संदेश की ओर मोड़ दिया गया।

सौरव दास-आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर CJP का बड़ा आरोप, रत्ना सिंह ने पुलिस पर उठाए सवाल

मजिस्ट्रेट को धमकी का मामला क्या है?

इस मामले की सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट को कथित धमकी भरे संदेश मिलने के संबंध में पुलिस ने केस दर्ज किया है। CJP की ओर से कहा गया कि यदि किसी व्यक्ति ने न्यायिक अधिकारी को धमकी दी है तो उसके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

रत्ना सिंह ने सवाल उठाया कि इस कथित संदेश का सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत से जुड़े मामले पर क्या सीधा असर है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संदेश से संबंधित पर्याप्त सत्यापन या सहायक दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में पेश नहीं किए गए।

‘यह राज्य की साजिश है’

रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि दोनों नेताओं को जेल में रखने के लिए प्रशासन और पुलिस जानबूझकर देरी कर रहे हैं। उन्होंने इसे कथित तौर पर ‘राज्य की साजिश’ तक बताया।

उनका कहना है कि CJP के वकील कई घंटे तक अदालत में इंतजार करते रहे और उन्होंने मजिस्ट्रेट से कथित धमकी भेजने वाले व्यक्ति की पहचान तथा उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अब अदालत की प्रक्रिया पर नजर

इस पूरे मामले में CJP के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई के बीच वास्तविक स्थिति अदालत की कार्यवाही और आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस ने आरोपों पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत अब केवल एक गिरफ्तारी का मामला नहीं रह गई है, बल्कि इसने पुलिस कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक अधिकारों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आगे की अदालत की कार्यवाही ही तय करेगी कि दोनों नेताओं की हिरासत पर क्या फैसला होता है और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है।

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