
बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू के संभावित विलय को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेडीयू नेता ललन सिंह की मौजूदगी के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस तस्वीर को दोनों दलों के विलय का आधिकारिक ऐलान नहीं माना जा सकता।
बीजेपी मुख्यालय की तस्वीर से क्यों शुरू हुई चर्चा?
मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह भी मौजूद रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर सामने आने के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में बीजेपी और जेडीयू के संभावित विलय को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद से ही विपक्षी दल जेडीयू के बीजेपी में विलय की संभावना को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, केवल एक तस्वीर या नेताओं की संयुक्त मौजूदगी से विलय की पुष्टि नहीं होती।
RJD ने कहा- कभी भी हो सकती है घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस की तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जेडीयू के बीजेपी में विलय की संभावना का दावा किया। उन्होंने समाजवाद की राजनीति को लेकर जेडीयू पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी अपनी वैचारिक पहचान से दूर जा रही है।
आरजेडी की इस प्रतिक्रिया ने बिहार में दोनों दलों के संबंधों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, विलय की घोषणा को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने जेडीयू के भविष्य पर उठाए सवाल
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने गठबंधन सहयोगियों के भीतर ऐसे लोगों को बढ़ावा देती है, जो समय आने पर पार्टी के हितों के मुताबिक काम करते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद जेडीयू के भीतर मतभेद सामने आए थे। उन्होंने आशंका जताई कि जनता दल यूनाइटेड भविष्य में कई हिस्सों में बंट सकती है।
क्षेत्रीय दलों को लेकर बीजेपी पर कांग्रेस का आरोप
स्नेहाशीष वर्धन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का क्षेत्रीय दलों को अपने प्रभाव में लेने का पुराना राजनीतिक तरीका रहा है। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा के दल का भी जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्रीय पार्टियों को इस संभावित राजनीतिक चुनौती को गंभीरता से समझना चाहिए।
ये आरोप कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इन दावों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
क्या बीजेपी और जेडीयू का विलय तय है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर बीजेपी और जेडीयू के विलय को अंतिम रूप दिए जाने की पुष्टि नहीं होती। न ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में ललन सिंह की मौजूदगी अपने आप में किसी विलय का प्रमाण है।
बिहार की राजनीति में दोनों दलों के संबंधों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। अब इस मुद्दे पर सबकी नजर बीजेपी और जेडीयू के आधिकारिक रुख पर रहेगी। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले दोनों दलों की ओर से स्पष्ट बयान या औपचारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।
