
NEET-UG पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील एपी सिंह ने केंद्र सरकार के नए पेपर लीक कानून और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया है। यह आरोपी पक्ष के वकील का बयान है।
नए कानून पर क्या बोले एपी सिंह?
एपी सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए नई व्यवस्था, प्रक्रिया और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू की है। उनके अनुसार, यह कानून विरोध-प्रदर्शनों, जनदबाव और संसद में हुई बहस के बाद जल्दबाजी में बनाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बनाए गए कानून न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को प्रभावित कर सकते हैं। यह उनका व्यक्तिगत मत है।
आरोपियों को बताया निर्दोष
वकील एपी सिंह ने दावा किया कि दिनेश बिवाल और विकास बिवाल पूरी तरह निर्दोष हैं। उन्होंने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित है और फिलहाल मामला शुरुआती चरण में है। उन्होंने निर्भया मामले के फास्ट-ट्रैक ट्रायल का उदाहरण देते हुए कहा कि जल्दबाजी में की गई न्यायिक प्रक्रिया के परिणामों से सीख लेने की आवश्यकता है। यह उनका बयान है।

जांच और सबूतों पर उठाए सवाल
एपी सिंह ने कहा कि पुलिस कस्टडी रिमांड की कार्यवाही के दौरान उनके मुवक्किलों के खिलाफ न तो कोई मनी ट्रेल मिला, न कॉल डिटेल, न फोटो और न ही कोई वीडियोग्राफी प्रस्तुत की गई। उनके अनुसार, आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद नहीं है। यह आरोपी पक्ष का दावा है।
NTA और CBI की कार्रवाई पर टिप्पणी
वकील ने कहा कि NTA ने 47 लोगों को सस्पेंड किया था और बाद में कथित तौर पर पेपर लीक से जुड़े अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनका दावा है कि जांच एजेंसियों के पास उन लोगों के खिलाफ पर्याप्त जानकारी और साक्ष्य हैं, जबकि उनके मुवक्किलों को बिना पर्याप्त आधार के गिरफ्तार किया गया। यह एपी सिंह का आरोप है।
जमानत को लेकर रखी दलील
एपी सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में “जमानत नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू होता है। उनके अनुसार, यदि कोई आरोपी जमानत की सभी कानूनी शर्तें पूरी करता है, तो उसे जमानत मिलनी चाहिए। यह आरोपी पक्ष की कानूनी दलील है।
