राजनीतिराज्य

अखिलेश यादव की मां पर टिप्पणी को लेकर नगर निगम में सियासी घमासान

लखनऊ नगर निगम के सदन में गुरुवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन विधेयक के लोकसभा में पास न होने का मुद्दा उठाया गया। इस विषय पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्षदों और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि विपक्षी पार्षदों ने महापौर सुषमा खर्कवाल को बोलने तक नहीं दिया। इसके जवाब में भाजपा पार्षदों ने जोरदार विरोध जताया और सदन में माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। यह घटना नगर निगम की राजनीति में बढ़ते टकराव को साफ तौर पर दिखाती है।

निंदा प्रस्ताव पारित विपक्ष ने किया बहिष्कार

भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन में बहुमत से पारित कर दिया गया। कुल 119 पार्षदों में से 93 पार्षदों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में सहमति जताई। हालांकि प्रस्ताव पारित होने से पहले ही विपक्षी पार्षदों ने हंगामे के बीच सदन से वॉकआउट कर दिया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पार्षद नारेबाजी करते हुए बैठक छोड़कर बाहर चले गए। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने महापौर के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाकर कार्यवाही जारी रखी और सदन की प्रक्रिया पूरी की गई।

अखिलेश यादव की मां पर टिप्पणी को लेकर नगर निगम में सियासी घमासान

आरोप प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक माहौल गरमाया

सदन में हंगामे के दौरान सपा पार्षदों ने महापौर पर आरोप लगाया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मां के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने महापौर को घेरने की कोशिश की और माहौल और अधिक गरमा गया। भाजपा पार्षदों ने इन आरोपों का विरोध करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की बैठक को राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का मंच बना दिया जहां दोनों पक्ष एक दूसरे पर तीखे हमले करते नजर आए।

महापौर के कैंप कार्यालय पर प्रदर्शन और सुरक्षा बढ़ी

इस विवाद के बाद स्थिति और गंभीर तब हो गई जब सपा कार्यकर्ताओं ने महापौर सुषमा खर्कवाल के कैसरबाग स्थित कैंप कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और नाम पट्टिका पर चप्पलें मारकर विरोध जताया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गया और महापौर के आवास तथा कैंप कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई। पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। महापौर ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे महिला का अपमान बताया और उच्च अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

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