
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित “सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त राष्ट्र” विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए नारी शक्ति के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल एक विचार नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। अगर नारी सशक्त होगी तो समाज अपने आप मजबूत बनेगा और देश भी विकास की ओर तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि यही वह स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म और धर्म का संदेश दिया था। यह भूमि हमें सिखाती है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है और चुप रहना समाधान नहीं होता।
इतिहास से मिला सबक, नारी सम्मान जरूरी
मुख्यमंत्री ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि उस युद्ध का कारण भी एक नारी का अपमान ही था। उन्होंने कहा कि यह हमें स्पष्ट संदेश देता है कि समाज में नारी का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। अगर नारी का अपमान होता है तो उसका परिणाम समाज और राष्ट्र दोनों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में नारी सशक्तीकरण के लिए आवाज उठाना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। संसद में महिलाओं के अधिकारों को दबाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच समाज के विकास में बाधा डालती है और इसे बदलना होगा।

प्रधानमंत्री के विजन में महिला शक्ति सबसे पहले
नायब सिंह सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पहले गुजरात को विकास का मॉडल बनाया और अब भारत को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाया है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री ने चार स्तंभों की बात कही थी, जिसमें सबसे पहले महिला शक्ति को रखा गया है। इसके बाद किसान, युवा और गरीब को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि देश की प्रगति में महिलाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। सरकार की नीतियों में भी महिलाओं को केंद्र में रखकर योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत हरियाणा से ही हुई थी और आज इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कई पंचायतों में बेटियों की संख्या बेटों से ज्यादा हो गई है, जो एक बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं सेना, चिकित्सा, न्याय और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। नौकरी में सिफारिश की व्यवस्था खत्म होने के बाद अब महिलाएं अपनी योग्यता के दम पर आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हर 20 किलोमीटर पर बेटियों के लिए एक राजकीय महाविद्यालय स्थापित किया गया है, जिससे उनकी शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
