भरत तिवारी एनकाउंटर केस में नया मोड़, पीड़ित परिवार से मिले बीजेपी विधायक आनंद मिश्रा, CID जांच की मांग

बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में सोमवार को नया राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। बक्सर से बीजेपी विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा पीड़ित परिवार से मिलने भोजपुर जिले के बिलौटी गांव पहुंचे। परिजनों से मुलाकात के बाद उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे जिला पुलिस के बजाय CID को सौंपने की बात कही।
पीड़ित परिवार से की मुलाकात
आनंद मिश्रा ने भरत तिवारी के पिता और अन्य परिजनों से मुलाकात कर उनकी बातें सुनीं। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल न्यायिक जांच के अधीन है और उन्हें उम्मीद है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच ऐसी एजेंसी से कराई जानी चाहिए जिस पर सभी पक्षों का भरोसा हो।
CID जांच की उठाई मांग
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि इस मामले की जांच जिला पुलिस के बजाय CID को सौंपना अधिक उचित होगा, ताकि निष्पक्षता पर किसी तरह का सवाल न उठे।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल न्याय होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जनता को यह भी दिखना चाहिए कि न्याय निष्पक्ष तरीके से किया जा रहा है।

गिरफ्तारी में देरी पर उठाए सवाल
आनंद मिश्रा ने मामले में गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे और सरकार का पक्ष जानने का प्रयास करेंगे।
उनके अनुसार, यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ समय पर कार्रवाई होना आवश्यक है।
वायरल वीडियो और डी.के. बसु गाइडलाइन का जिक्र
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही परिस्थितियां जांच में सही साबित होती हैं और भरत तिवारी ने हथियार छोड़ने के बाद गोली खाई, तो यह डी.के. बसु गाइडलाइन और न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मामले को मानवाधिकार के दृष्टिकोण से भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
आनंद मिश्रा ने कहा कि किसी भी बड़े ऑपरेशन में अतिरिक्त पुलिस बल या एसटीएफ की तैनाती आमतौर पर स्थानीय पुलिस के अनुरोध पर होती है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
परिवार से 12 दिन बाद मिलने को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि वह निजी कारणों से बाहर थे, लेकिन इस दौरान स्थानीय विधायक, डीआईजी और एसपी से लगातार संपर्क में रहकर पूरे मामले की जानकारी लेते रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भरत तिवारी की शिकायतों और मांगों पर समय रहते गंभीरता से ध्यान दिया गया होता, तो संभव है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
