भागलपुर में बिजली विभाग की खुली पोल, ट्रांसफार्मर का फेज जोड़ने में लगे 16 घंटे

बाढ़ और बारिश के मौसम में बिजली लोगों की सबसे बड़ी जरूरतों में शामिल है, लेकिन सबौर की पत्रकार नगर कॉलोनी में उपभोक्ताओं को एक मामूली खराबी के लिए करीब 16 घंटे इंतजार करना पड़ा। ट्रांसफार्मर का फेज उड़ने के बाद विभागीय इंतजामों की कमी ने पूरी रात लोगों को उमस और अंधेरे में परेशान किया।
दोपहर में फेज उड़ा, रात तक नहीं पहुंची मदद
सबौर नगर पंचायत की पत्रकार नगर कॉलोनी में बिजली आपूर्ति करने वाले ट्रांसफार्मर का फेज गुरुवार दोपहर करीब 2 से 3 बजे के बीच उड़ गया। बिजली पूरी तरह गुल नहीं हुई, लेकिन वोल्टेज बेहद कम हो गया।
हालात ऐसे रहे कि घरों में पानी की मोटर और फ्रिज चलना मुश्किल हो गया। पंखे भी ठीक से नहीं चल रहे थे और बल्ब की रोशनी काफी कमजोर हो गई थी।
शिकायत के बाद भी घंटों इंतजार
समस्या सामने आने के बाद भी देर शाम तक कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा। रात में परेशानी बढ़ने पर उपभोक्ताओं ने विभाग के जेई दीपक कुमार राही को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद एक सरकारी मिस्त्री को मौके पर भेजा गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब बिजली की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन इसके बाद विभागीय व्यवस्था की एक और कमी सामने आ गई।
मिस्त्री बोला- सीढ़ी उपलब्ध कराइए
ट्रांसफार्मर के पोल पर चढ़कर फेज ठीक करने के लिए मिस्त्री के पास सीढ़ी नहीं थी। मिस्त्री ने कथित तौर पर उपभोक्ताओं से सीढ़ी उपलब्ध कराने को कहा।
रात के समय कॉलोनी के लोगों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि आखिर वे इतनी बड़ी सीढ़ी कहां से लेकर आएं। नतीजा यह रहा कि मरम्मत का काम नहीं हो सका और बिजली की समस्या पूरी रात बनी रही।

उमस में बच्चों और बुजुर्गों ने गुजारी रात
फेज ठीक नहीं होने के कारण कॉलोनी के लोगों को पूरी रात उमस और गर्मी में जागकर गुजारनी पड़ी। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाढ़ और बारिश के मौसम में जब बिजली और पंखे की जरूरत और बढ़ जाती है, उस समय लोगों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ी।
सुबह सात बजे ठीक हुआ फेज
काफी इंतजार के बाद शुक्रवार सुबह करीब सात बजे ट्रांसफार्मर का फेज ठीक किया गया। इसके बाद लोगों को बिजली व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद जगी।
हालांकि, आपूर्ति बहाल होने के बाद भी परेशानी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। बिजली आने के साथ ही बार-बार ट्रिपिंग और कम वोल्टेज की समस्या सामने आने लगी।
बिजली आई, लेकिन राहत अधूरी रही
कम वोल्टेज और ट्रिपिंग के कारण घरों में पानी की मोटर, फ्रिज समेत कई विद्युत उपकरण सामान्य तरीके से नहीं चल सके।
यानी करीब 16 घंटे के इंतजार के बाद बिजली तो वापस आई, लेकिन उपभोक्ताओं को पूरी राहत नहीं मिल सकी। इससे स्थानीय लोगों में विभाग की कार्यशैली को लेकर नाराजगी देखने को मिली।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
बाढ़ और बारिश के मौसम में बिजली विभाग से बेहतर तैयारी की उम्मीद की जाती है। ट्रांसफार्मर में खराबी जैसी स्थिति आने पर कर्मचारियों के साथ जरूरी उपकरण भी मौके पर उपलब्ध होने चाहिए।
लेकिन पत्रकार नगर कॉलोनी में एक फेज ठीक करने के लिए सीढ़ी तक उपलब्ध नहीं होने का मामला विभागीय तैयारियों पर सवाल खड़े करता है। जब एक छोटी तकनीकी खराबी दूर करने में पूरी रात और करीब 16 घंटे लग जाएं, तो सवाल सिर्फ बिजली का नहीं रहता—सवाल उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी बन जाता है, जिस पर आपात स्थिति में हजारों उपभोक्ता भरोसा करते हैं।
