
हरियाणा सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत राज्य में अब तक 1.75 करोड़ कृषि भूखंडों की जियो-रेफरेंसिंग यानी डिजिटल मैपिंग पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा 11.58 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया गया है और 8.32 लाख किसान आईडी तैयार की जा चुकी हैं। राज्य के लगभग 96 प्रतिशत गांवों को डिजिटल मानचित्रण के दायरे में लाया जा चुका है, जबकि शेष गांवों को अगले दो महीनों में कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
6808 गांवों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
मुख्य सचिव Anurag Rastogi की अध्यक्षता में आयोजित एग्रीस्टैक संचालन समिति की बैठक में बताया गया कि राज्य के कुल 7100 गांवों में से 6808 गांवों की जियो-रेफरेंसिंग पूरी हो चुकी है। यह कुल 95.89 प्रतिशत कवरेज के बराबर है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य डिजिटल फसल सर्वेक्षण और प्रमाणित किसान रजिस्ट्री तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित होगा। इससे भूमि और फसल से जुड़ी जानकारी अधिक सटीक और पारदर्शी रूप में उपलब्ध होगी।

किसानों को योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
मुख्य सचिव ने कहा कि एग्रीस्टैक के माध्यम से किसानों के रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व और फसल संबंधी जानकारी को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र किसानों तक तेजी से पहुंच सकेगा। साथ ही डेटा में दोहराव, त्रुटियों और फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी। राजस्व विभाग की वित्तायुक्त Sumita Mishra ने बताया कि कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए किसान पंजीकरण अभियान को और तेज किया गया है।
खरीफ 2026 के लिए डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारी
बैठक में खरीफ-2026 डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। यह सर्वेक्षण राज्य के सभी 23 जिलों में जियो-रेफरेंस किए गए कृषि भूखंडों पर किया जाएगा। इसके लिए करीब 6500 सर्वेक्षकों की तैनाती की जाएगी और सर्वेक्षण अगस्त 2026 से शुरू होने की संभावना है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित सत्यापन मामलों का जल्द निपटारा किया जाए और प्रत्येक भूखंड को किसान आईडी से जोड़ा जाए। सरकार का मानना है कि भूमि रिकॉर्ड, फसल आंकड़ों और किसान डेटाबेस के एकीकरण से कृषि क्षेत्र के लिए मजबूत डिजिटल आधारभूत ढांचा तैयार होगा।
