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अपनापन पुस्तक में शिवराज ने बताया मोदी की संवेदनशीलता और राजनीतिक रणनीति के राज

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नई किताब “अपनापन” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने लंबे राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को विस्तार से साझा किया है। यह पुस्तक 26 मई को आधिकारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। इसमें उन्होंने पिछले 35 वर्षों की राजनीतिक यात्रा और मोदी के साथ अपने अनुभवों को भावनात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से बताया है। किताब में कई ऐसे प्रसंग शामिल हैं जो भाजपा नेतृत्व के अंदरूनी रिश्तों और निर्णय प्रक्रिया को समझने में मदद करते हैं।

2023 चुनाव और राजनीतिक संकट से उबरने की कहानी

शिवराज चौहान ने किताब में दावा किया है कि 2023 मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान वह एक बड़े राजनीतिक और मानसिक दबाव से गुजर रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें न केवल भावनात्मक समर्थन दिया बल्कि सही मार्गदर्शन भी दिया। चौहान के अनुसार एक अहम मौके पर मोदी ने उनसे कहा था कि दिल्ली आकर मुलाकात करें, और यही उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाला संकेत साबित हुआ। बाद में जून 2024 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।

अपनापन पुस्तक में शिवराज ने बताया मोदी की संवेदनशीलता और राजनीतिक रणनीति के राज

मोदी का फोन कॉल और व्यक्तिगत संवेदनशीलता का प्रसंग

किताब में एक विशेष प्रसंग का उल्लेख है जिसमें शिवराज चौहान बताते हैं कि चुनावी तनाव के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया। मोदी ने उनसे बेहद आत्मीयता से कहा कि वह केवल मुख्यमंत्री या नेता के रूप में नहीं बल्कि “अपने शिवराज” के रूप में बात कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि कुछ समय एकांत में बिताकर मानसिक रूप से खुद को मजबूत करें। चौहान के अनुसार यह कॉल उनके लिए एक भावनात्मक सहारा साबित हुआ और उन्होंने इसे मोदी की असाधारण संवेदनशीलता बताया।

विपक्षी हमले, कांग्रेस पर आरोप और राजनीतिक संदेश

शिवराज चौहान ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि 2023 के चुनावी माहौल में विपक्ष, खासकर कांग्रेस ने उनके बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश किया और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि कई बार उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर गलत प्रचार भी किया गया। हालांकि इन सभी परिस्थितियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की सलाह पर उन्होंने उत्तराखंड जाकर आत्मचिंतन किया और मानसिक रूप से खुद को फिर से मजबूत किया। 26 मई को होने वाले पुस्तक विमोचन में वेंकैया नायडू और एच.डी. देवेगौड़ा जैसे वरिष्ठ नेता शामिल होंगे, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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