
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरण का आह्वान किया। नगर निगम के विशेष सदन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमापार से मादक पदार्थों की तस्करी देश के युवाओं को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश है, जिसका मुकाबला केवल सरकार ही नहीं बल्कि पूरे समाज को मिलकर करना होगा। उन्होंने पुलिस से बड़े नशा तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तेज करने की भी अपील की।
युवाओं को बचाना समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
कटारिया ने कहा कि पंजाब संतों, गुरुओं, शहीदों और वीर सैनिकों की धरती है, जिसकी पहचान त्याग, बलिदान और युवा शक्ति से है, न कि नशे से। उन्होंने विशेष रूप से 13 से 19 वर्ष की आयु के किशोरों को सबसे संवेदनशील बताते हुए कहा कि अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को बच्चों की गतिविधियों, संगत और व्यवहार पर लगातार नजर रखनी चाहिए। उनके अनुसार नशा मुक्ति की शुरुआत स्कूलों और कॉलेजों से ही होनी चाहिए।

नशे के शिकार युवाओं को मिले दूसरा अवसर
राज्यपाल ने कहा कि नशे की लत में फंसे युवाओं को समाज से अलग करने के बजाय उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज के साथ-साथ कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास की बेहतर व्यवस्था हो, ताकि इलाज के बाद युवा दोबारा नशे की गिरफ्त में न जाएं और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
तस्करों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी
कटारिया ने कहा कि पंजाब में एनडीपीएस एक्ट के तहत नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि केवल कानून के सहारे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से ही नशा मुक्त पंजाब और नशा मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
जनप्रतिनिधियों और समाज से सहयोग की अपील
राज्यपाल ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, धर्मगुरुओं, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि समाज जागरूक होकर आगे आए और युवा पीढ़ी को सही दिशा मिले, तो भविष्य में नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
