यूपी के 15 जिलों में अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर वार

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर नए पोस्टर सामने आने के बाद राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। प्रदेश के 15 जिलों में लगाए गए इन पोस्टरों में सपा की पुरानी सरकार के कामकाज से लेकर परिवारवाद और भर्ती प्रक्रिया तक कई मुद्दे उठाए गए हैं। पोस्टरों में अतीक अहमद मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।
यह पोस्टर ऐसे समय सामने आए हैं जब उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान चल रहा है। पोस्टरों में लिखे नारों के जरिए अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर निशाना साधा गया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इन पोस्टरों को किस संगठन या व्यक्ति ने लगवाया है।
चाय समोसा और रसमलाई वाले नारे की चर्चा
पोस्टरों पर लिखा गया है कि सपाइयों का क्या भरोसा चाय समोसा रस मलाई सारे माफिया अपने भाई। इस नारे के जरिए सपा पर माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया गया है। पोस्टरों में अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों का इस्तेमाल भी इसी संदर्भ में किया गया है।
लखनऊ बलिया मऊ गाजीपुर आजमगढ़ वाराणसी बस्ती हरदोई और सीतापुर समेत 15 जिलों में ऐसे पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
भर्ती और परिवारवाद को लेकर भी निशाना
इन पोस्टरों में साल 2013 की यूपीपीसीएस भर्ती का मुद्दा भी उठाया गया है। पोस्टर में दावा किया गया है कि 86 में से 56 पदों पर एक जाति विशेष के लोगों की भर्ती हुई थी। इसी को लेकर एक जाति की सत्ता आने जैसा नारा लिखा गया है। यह पोस्टर में लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
इसके अलावा सपा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए पार्टी को एक परिवार तक सीमित बताने वाला नारा भी लिखा गया है।
इफ्तार पार्टी और कब्रिस्तान के बजट का भी जिक्र
पोस्टरों में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी और सपा सरकार के समय हुए मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं कब्रिस्तानों की बाउंड्री के लिए बजट दिए जाने को लेकर भी तंज कसा गया है।
एक दूसरे पोस्टर पर गिरगिटेश का क्या भरोसा जैसा नारा लिखा गया है जिसमें अखिलेश यादव को निशाना बनाया गया है।
फिलहाल इन पोस्टरों को लेकर सियासी चर्चा जारी है लेकिन इन्हें लगवाने वालों की पहचान और इन आरोपों पर सपा की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
