कैंसर की महंगी दवाएं 70% तक होंगी सस्ती? सरकार की बड़ी तैयारी

कैंसर का इलाज कराने वाले मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार कैंसर की महंगी दवाओं की कीमत कम करने की तैयारी कर रही है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ दवाओं की कीमत 20 से 70 फीसदी तक कम हो सकती है। इसके लिए दवाओं पर मिलने वाले ट्रेड मार्जिन को 30 फीसदी तक सीमित करने का प्रस्ताव है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में इस योजना की जानकारी दी है। इसका मकसद दवाओं की कीमत पर लगाम लगाना है ताकि मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा पैसे खर्च न करने पड़ें।
इस मामले में 8 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी NPPA की बैठक हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को एक विशेषज्ञ समिति बनाई। इस समिति को यह तय करने की जिम्मेदारी दी गई है कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली किन दवाओं पर यह नियम लागू किया जा सकता है। समिति को 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। रिपोर्ट आने के बाद NPPA आगे का फैसला करेगा।
पहले भी कम की गई थीं दवाओं की कीमतें
केंद्र सरकार ने साल 2019 में भी ऐसा कदम उठाया था। उस समय 42 चुनी हुई कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित कर दिया गया था। सरकार के मुताबिक इसके बाद 526 ब्रांड की दवाओं की अधिकतम कीमत कम हुई थी। कंपनियों से मिले आंकड़ों के आधार पर मरीजों को हर साल करीब 2984 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान लगाया गया था।
दवा कंपनियों की चिंताओं पर भी नजर
सरकार इस फैसले को लागू करने से पहले दवा कंपनियों और दूसरे पक्षों की राय भी सुन रही है। कुछ संगठनों ने चिंता जताई है कि कीमतों पर ज्यादा सख्ती होने से छोटी दवा कंपनियों के कारोबार रोजगार और दूरदराज के इलाकों में दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।
इसी वजह से सरकार पहले उन दवाओं की पहचान करना चाहती है जिन पर नया नियम लागू किया जा सके। फिलहाल विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही साफ होगा कि किन दवाओं की कीमत घटेगी और मरीजों को कितनी राहत मिलेगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी कीमतों में कटौती लागू नहीं हुई है। 20 से 70 फीसदी तक कमी सरकार का अनुमान है और अंतिम फैसला रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा।
