
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर याचिका दायर की गई है। इस मामले की ग्राह्यता पर सुनवाई के लिए 12 मई की तारीख तय की गई है। यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की पीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दाखिल रिट याचिका पर दिया है। यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि राहुल गांधी ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है, जिसका कोई स्पष्ट और ज्ञात स्रोत नहीं है। याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता और व्यवसायी हैं, ने इससे पहले भी राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता को लेकर याचिका दायर की थी, जिस पर पहले से सुनवाई चल रही है। अब नए आरोपों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है, जिसमें जांच एजेंसियों की भूमिका भी सामने लाई गई है।

CBI, ED और अन्य एजेंसियों को बनाया गया पक्षकार
इस याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और उत्तर प्रदेश पुलिस को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राहुल गांधी की सभी संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि आय और संपत्ति के बीच कथित अंतर की सच्चाई सामने आ सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है क्योंकि इसमें राष्ट्रीय स्तर के वित्तीय मामलों से जुड़े गंभीर सवाल उठते हैं।
पहले भी नागरिकता विवाद को लेकर रहे चर्चा में
एस. विग्नेश शिशिर इससे पहले भी राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता और दोहरी नागरिकता को लेकर याचिका दायर कर चुके हैं। उनका दावा है कि राहुल गांधी ने वर्ष 2003 से 2009 के बीच खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था और उनके पास कई देशों की नागरिकता होने के संकेत हैं। हालांकि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। अब आय से अधिक संपत्ति का नया मामला जुड़ने से कानूनी प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है, जिस पर सभी की नजरें 12 मई की सुनवाई पर टिकी हैं।
